---

▼

बुधवार, 23 सितंबर 2026

4874..हौसले का दामन

।।प्रातःवंदन।।

" अरुणिमा आते ही देखो, 

    विहग वृन्द उड़ान भरते,

     शक्ति पंखों में समेटे, 

       नाप लेते दिशा चारों।

        अब उठो कुंठा बुहारो।"

डॉ.मृदुल कीर्ति

आइए एक बार फिर साहित्यिक कृतियों से परिचित होतें हैं..✍️

आ ! नंगे पैर रेत पर चलें..

आ ! नंगे पैर रेत पर चलें

खुशबू से हवाओं में घुलें,

बाँसुरी की तान पर झूमें

आहिस्ता से फूलों को चूमें,..

✨️

अपने अपने राम

रामकथा को आधार बना कर अभिव्यक्ति के कौन-कौन से अनूठे आयाम का संधान संभव है इसका उदाहरण है भगवान सिंह की यह पुस्तक ‘अपने अपने राम‘। राम का चरित्र वर्ण कुव्यवस्था के खिलाफ और समावेशी राजनय के व्याख्याकार ..

✨️

एक गीत 

 झूठे-झूठे सपने, झूठे-झूठे वादे

मन ख़ुद से करता है 

सच्ची-सच्ची बातों, सच की राहों 

से शायद डरता है !..

✨️

तबेले में शिक्षा

अरसे

से गुम थी

पर अंततः

एक तबेले में

खुद अधमरी होते हुए भी

अधमरी गाय को

घास डालती मिली—

शिक्षा।

✨️

जालों से उलझनों के ,जैसे हो उबर जाएं

चौराहे से निकलकर , कोई तो डगर पाएं ।

थामे रहें न छोड़ें कभी हौसलों का दामन ।

चाहे भले ही कितनी चलती रहें हवाएं ।

✨️

।।इति शम।।

धन्यवाद 

पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️


 

3 टिप्‍पणियां:

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।