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रविवार, 6 सितंबर 2026

4857 ..जो दिया उस ने दिया जो भी लिया उस से लिया,

 सादर अभिवादन 

शिक्षक और गुरु में क्या अंतर है ?
आज सर्वश्रेष्ठ शिक्षक कलाम साहब को नमन करते हैं...विद्यालय और विश्वविद्यालय के
सभी शिक्षकों को नमन करते हैं जिनकी वजह से हमें पढ़े-लिखे का दर्जा मिला है।
स्वामी परमहंस जी महाराज को गुरु पूर्णिमा के दिन याद करते हुए नमन करेंगे।


माता को प्रथम गुरु कह सकते हैं...
प्रथम शिक्षक नहीं।

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अब ये मन ज्ञान की बातों में नहीं है लगता,
अब तो मन को जो लगी लत मेरे गोपाल की है.

जो दिया उस ने दिया जो भी लिया उस से लिया,
मेरी साँसों पे हुकूमत मेरे गोपाल की है.






नेहा ने जाकर दरवाजा खोला। सामने पड़ोस में रहने वाली एक बुजुर्ग महिला खड़ी थीं। चेहरे पर अपनापन था, लेकिन थोड़ी झिझक भी। उन्होंने धीरे से कहा, “बेटी, नमस्ते… आज घर में मेहमान आ गए हैं। चाय बनाने लगी तो पता चला चीनी खत्म हो गई। अगर थोड़ा सा मिल जाए तो बड़ी मेहरबानी होगी।”




अवसाद , सन्नाटा .. 
अधजगी रातें

कान में बजती अनगिनत बेगैरत आवाज़ें
और टूटता तिलिस्म

कविता 
हमेशा कविता नहीं होती है




माखन  मटकी
देख यशोदा
असली-नकली पहचाने
मिलावटी जब
दूध दही हो
लल्ला को क्या दे  खाने
छींके पर 
भूख टंगी कहती
स्विगी से ऑर्डर कर आए




नंद-यशोदा का वो आँगन 
कुंज गली, यमुना तट, पनघट, 
वृक्ष कदंब का, व्रज की भूमि 
अब सुनते भी तेरी आहट ! 




आज शिक्षक दिवस के पुनीत  अवसर पर हमारे मन में हमारे दो राष्ट्रपति सजीव हो उठते हैं। एक तो राधाकृष्णन और दूसरे अब्दुल कलाम। पहले ने  अपनी  जन्मतिथि को शिक्षकों के नाम समर्पित कर दिया, तो दूसरे ने अपने जीवन की अन्तिम साँस भी शिक्षक की भूमिका निबाहते हुए ही ली। ज्ञातव्य है कि एक कक्षा में पढ़ाते समय ही कलाम साहब का देहावसान हो गया था। पता नहीं भारत के भविष्य को ऐसे महिमामय महापुरुष और भारत के सत्ता शिखर को ऐसे सुखद संयोग फिर कभी नसीब हो या न हो! परन्तु यह  बात तो तय है जो जीवन के कुरुक्षेत्र में योग का अमृत बाँचते हुए आध्यात्मिक गुरु योगेश्वर श्री कृष्ण ने किंकर्त्तव्यविमुढ और आत्मिक उलझनों में उलझे अवसन्न अर्जुन को ये शाश्वत वचन सुनाए थे कि  ‘कर्म के बीज का नाश नहीं होता’। 

सादर समर्पित
वंदन

2 टिप्‍पणियां:

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