शीर्षक पंक्ति: आदरणीया साधना वैद जी
की रचना से।
सादर अभिवादन।
आइए पढ़ते हैं सोमवारीय अंक में पाँच चुनिंदा
रचनाएँ-
कवि दैनिक जीवन के बेहद सूक्ष्म बिंबों से
मनुष्य की अंधी तृष्णा और संतोष के अंतर को उघाड़ते हैं।
"गौरैया" कविता में पक्षी और मनुष्य के
चरित्र की तुलना दृष्टव्य है:
"गौरैया /
रोज आती है / एक मुट्ठी चावल से / बस चार दाने ही उठाती है..."
"आदमी /
चावल के बोरों की गिनती करते हुए / कभी नहीं थकता है" कवि दैनिक जीवन के बेहद सूक्ष्म
बिंबों से मनुष्य की अंधी तृष्णा और संतोष के अंतर को उघाड़ते हैं।
"गौरैया" कविता में
पक्षी और मनुष्य के चरित्र की तुलना दृष्टव्य है:
"गौरैया /
रोज आती है / एक मुट्ठी चावल से / बस चार दाने ही उठाती है..."
"आदमी /
चावल के बोरों की गिनती करते हुए / कभी नहीं थकता है"
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जीवन भी ऐसा ही है
कभी धूप,
कभी घनघोर घटाएँ,
कभी उजास,
कभी अनंत प्रतीक्षा ।
नेह के घट से
अमृत छलकता है,
तो उसी प्रेम की गहराई में
अश्रु भी जन्म
लेते हैं ।
प्रवासी पंछी
अनजान देश में
ढूँढे बसेरा
छूटे माँ बाप
छूटा कुल कुनबा
गाँव शहर
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कोई इधर गया, कोई उधर गया
कोई भी न मेरी जानिब हुआ
जब से वो शख़्स साहिब हुआ
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इस्मत चुगताई: बागी तेवरों वाली लेखिका, जिन्होंने मौत के बाद दफ्न होने के
बजाय दाह-संस्कार को चुना
प्रवासी पंछी
जवाब देंहटाएंअनजान देश में
ढूँढे बसेरा
सुंदर अंक
आभार
वंदन
सुप्रभात ! सुन्दर पठनीय सूत्रों से सजा अंक । अंक में सृजन साझा करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार 🙏
जवाब देंहटाएंसुप्रभात! सराहनीय रचनाओं का सुंदर संयोजन
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