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बुधवार, 5 अगस्त 2026

4825..अंतिम बूंद

 भोर वंदन 

"सूरज की- 

एक किरण पीपल के पत्ते पर ठहरी है !

एक किरण बेले के फूलों पर फिसली है !

एक किरण ताल की तरंगों पर थिरकी है !

एक किरण शिशु की दाँतुलियों पर बिहँसी है..!!"

 त्रिलोचन

चलिए नियत समयानुसार आज की प्रस्तुति में ...

काकी की चिंता

 फोन आया है काकी का गांव से 

इस बार अषाढ नहीं बरसा 

खेत सब उपटे पडे हैं 

इस बार आम भी नहीं फले थे 

बिना खाद पानी के ..

✨️

अंतिम बूंद - -


ईथर की तरह विलीन हो जाएंगे

एक दिन सभी अंतर के सुप्त

दहन, उम्र से लंबी है

चाहतों का

सूचीपत्र,

अंतिम

बिंदु में भी लगे ठहरा हुआ सा

ख़्वाहिशों का एक बूंद इत्र,..

✨️

हमारे हाथ जले उन ही दीयों से 'ग़ाफ़िल'

जिन्हें हवा के थपेड़ों से हम बचाए हैं

-'ग़ाफ़िल'

✨️

परिवेश

अफसोस, कि अब ये

कैसा ज़माना आ रहा है,

बोलने को तो गद्दार ..

✨️

माफ़ी

 जड़ से सबको साफ़ किया

फिर कहते हैं माफ़ किया !

लाठी-गोली बच्चों को दी

कहते हैं इंसाफ़ किया।

✨️

।।इति शम।।

धन्यवाद 

पम्मी सिंह ' तृप्‍ति '..✍️



2 टिप्‍पणियां:

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