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शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

4820...मील का पत्थर हूॅं मैं...

शुक्रवारीय अंक में 
आप सभी का हार्दिक अभिनंदन।
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शुक्रवारीय अंक में 
आप सभी का हार्दिक अभिनंदन।
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आज कालजयी साहित्यकार की
जयंती है।
प्रेमचंद ने कहा था-

बनी हुई बात को निभाना मुश्किल नहीं है 
बिगड़ी हुई बात को बनाना मुश्किल है।
( रंगभूमि)

क्रिया के पश्चात प्रतिक्रिया नैसर्गिक नियम है।
(मानसरोवर-सवा सेर गेहूँ)


टप-टपाती मादक बूँदों की
रुनझुनी खनक,
मेंहदी की 
खुशबू से भींगा दिन,
पीपल की बाहों में
झूमते हिंडोले,
पेड़ों के पत्तों,
छत के किनारी से
टूटती
मोतियों की पारदर्शी लड़ियाँ
आसमान के
माथे पर बिखरी
शिव की घनघोर जटाओं से
निसृत
गंगा-सी पवित्र
दूधिया धाराएँ
उतरती हैं
नभ से धरा पर,
हरकर सारा विष ताप का
 अमृत बरसाकर
प्रकृति के पोर-पोर में
भरती है
प्राणदायिनी रस
सावन में...।
#श्वेता


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आज की रचनाऍं-

फुर्सत मिले कभी,
दर्पण में
अपनी आँखों को
ज़रा देर तक निहारना।

शायद तब
तुम्हें भी मालूम पड़े
कि वे
कितना कुछ कह जाती हैं—
बिना एक भी शब्द बोले।



 मेरे पंखों पर क्यूं 
उतर आता है तुम्हारा वज़न।
आईना बन जाते हो क्यों?
मुझे सुंदर तो कभी, उदास दिखने को।
मील का पत्थर हूं मैं
पर तुम चाहो जब मुझे
पत्थर तो कभी, झरना बना देते हो।
पृथ्वी हूं, घूमती हूं धुरी पर अपनी।
पर तुम सूर्य बन कर।
कभी रात तो कभी, दिन दिखा देते हो।



सृजन के लिये 
कई बार निर्माण भी होता है
जब गढी जाती है नई मूर्ति 
विध्वंस के बाद

अन्तर प्लावन

कुछ बह जाता है क्षण में हम
देखते रह जाते हैं अवाक,
उन निःशब्द पलों में
जीवन पा जाता
है आत्म सुख
अपरम्पार,
इस
असीम डूब में निहित है सारा संसार,

मन

अगर अपनी क्षमताओं पर अपनी कल्पना पर विश्वास नहीं करेंगे तो अवचेतन में नकारात्मक तत्व जुड़ने लगेंगे जो आपके पंखों को अवश कर देंगे । वे फड़फड़ायेंगे पर उन पंखों को लगेगा कि नहीं ये नहीं उड़ेंगे और कहीं  बिखर जायेंगे। यदि विश्वास नहीं डगमगायेगा तो असफलता आपको नया मार्ग दिखायेगी।


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आज के लिए इतना ही
मिलते है अगले अंक में।
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3 टिप्‍पणियां:

  1. विश्वास नहीं डगमगायेगा तो असफलता आपको नया मार्ग दिखायेगी।
    बेहतरीन अंक
    आभार
    वंदन

    जवाब देंहटाएं
  2. टप-टपाती मादक बूँदों की रुनझुनी खनक युक्त शानदार अंक
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  3. धनपतराय श्रीवास्तव के नाम से विरले लोग ही जानते होंगे
    मुंशी प्रेमचंद बोलने दिमाग की बत्ती जल जाती है
    सादर नमन उनको
    वंदन

    जवाब देंहटाएं

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