---

बुधवार, 10 जून 2026

4769..आँखों की दहलीज़..

 भोर वंदन 

"रश्मियों की कनक धारा में नहा,

मुकुल हँसते मोतियों का अर्घ्य दे;

स्वप्न शाला में यवनिका डाल जो

तब दृगों को खोलता वह कौन है?

सुरभि वन जो थपकियां देता मुझे,

नींद के उच्छवास सा, वह कौन है?"

महादेवी वर्मा

सुप्रभाती के साथ बुधवारिय अंक के क्रम को बढाते हुए ..

तीसरा रास्ता


वह नज़र झुकाकर चलती थी,

और शोहदे उसके पीछे-पीछे चलते थे।

उसके लिये

रास्ता अक्सर अपमान में बदल जाता था।


उसने हिम्मत की,

एक दूसरी राह चुनी—

कुछ अनकही सी...

कुछ अनकही सी बातें हैं,

जो शब्दों तक आकर लौट जाती हैं,

आँखों की दहलीज़ पर ठहरकर

चुप्पियों में कहीं खो जाती हैं।

कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं,..

✨️

व्याकुल सकल जहान है, नभ से बरसे आग।

लगता अब रवि को नहीं, धरती से अनुराग ।

लू की लपटों से हुआ , जन जीवन बेहाल...

✨️

प्रिय का वियोग   

"क्या हुआ, प्रिय? तुम इतने अशांत और उदास ! तुम्हारी नील प्रभा पर कोहरे की परछाई!?"

नीलांबर ने एक गहरी आह भरी। "क्या कहूँ, धरा! मेरा अस्तित्व ही तुम्हारे सौंदर्य को निहारने में है। तुम्हारा हरित आवरण, तुम्हारे गिरि-शिखरों पर बिछी हिम की चादर, तुम्हारे सागरों की असीम गहराइयां - यही तो मेरे जीवन का सार है। परंतु पिछले कुछ दिनों से यह कोहरा मेरे और तुम्हारे बीच एक..

✨️

गुजारिश

गुजारिश थी मेरी शबनमी मोती बूँदों की बोलती लिखावट कहानी की l

सदियाँ ना लगाना कोरे कागज लिखे मौन अल्फाजों सुनने जुबानी सी ll..

✨️

इति शम 

धन्यवाद 

पम्मी सिंह ' तृप्‍ति '..✍️

5 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात! सुंदर भूमिका और पठनीय लिंक्स का चयन

    जवाब देंहटाएं
  2. उत्कृष्ट लिंक्स से सजी लाजवाब प्रस्तुति।
    मेरी रचना साझा करने के लिए तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार पम्मी जी !

    जवाब देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।