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बुधवार, 8 अप्रैल 2026

4706..इंसान खुद को भगवान बना बैठा है

 ।।प्रातःवंदन।।

जंग… आखिर देती ही क्या है?

जंग जीतने वाले शायद जश्न पर हार तो इंसानियत की होती है..बचे  मासूम चेहरों को न राजनीति समझ आती, न ही सरहदें…उन्हें बस विवशता  भरी नजर और भूख लगती है और थोड़ा सा सुकून की आस।बहुत दुखद है यह देखना..

यह गुंजार कहाँ से आयी

चौंक पड़ा, मैं बोल उठा,

कँपने लगा हृदय, हरि जाने

मैं भय-विह्वल डोल उठा !

माखनलाल चतुर्वेदी

इन्हीं  कशमकश के बीच बुधवारिय प्रस्तुतिकरण लिए आज फिर हाजिर हूं..

माना अभी दूर जाना है


कितनी पूनम जागेंगे हम

कितने सूरज और देखने, 

 छुपा गर्भ में यह भावी के

किंतु सजा सकते हैं सपने !

✨️

नई पीढ़ी !

                   अस्पताल के बाहर कार और बाइक के स्टैंड अलग अलग बने थे और दोनों तरफ वाहन खड़े थे कि इतने में हड़बड़ी में एक साइकिल वाला आया और जल्दी से साइकिल खड़ी करके अंदर की तरफ भागा। 

जल्दी में साइकिल डगमगा गयी, 

✨️

आज इंसान खुद को भगवान बना बैठा है

अब AI (आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस) का जमाना है। बनाने वाले ने तो न जाने क्या सोच कर बनाया होगा मगर इस्तेमाल करने वालों के तो क्या कहने।

बनाया तो भगवान ने भी ..

✨️

चार दिशाओं में
मिलने के लिए आना चाहती थी
मायके की छत के नीचे
ताकि बांट सके अपने संताप को
और सुख के संदूक को 

पर आ न सकी कभी इकट्ठी..

✨️

तुम भुला दो मुझे बचपन की तरह

मिलेंगे अब तो सिर्फ़ दुश्मन की तरह

तुम भुला दो मुझे बचपन की तरह


।।इति शम।।

धन्यवाद 

पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️

2 टिप्‍पणियां:

  1. अचानक स्पोर्ट्स साइकिल आकर बगल में रुकी और बोली -
    'मैं आपकी कोई सहायता कर सकती हूँ?'
    बाइक ने सिर उठा कर देखा
    और फिर चुपचाप सिर झुका लिया।
    सुंदर अंक दिया आपने
    आभार
    कल का दिन भी आपका ही हो
    सादर वंदन

    जवाब देंहटाएं
  2. सुप्रभात! सार्थक भूमिका और पठनीय रचनाओं का संयोजन, आभार पम्मी जी!

    जवाब देंहटाएं

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