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बुधवार, 17 अप्रैल 2024

4099..भाल पे मोती जड़ा...


।।प्रातःवंदन ।।

"जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भए अनुकूल।

चर अरु अचर हर्षजुत राम जनम सुखमूल॥"

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के अवतरण के अति पावन दिवस श्रीरामनवमी की आप सभी को हार्दिक बधाई..प्रस्तुतिकरण को आगे बढ़ते हुए लिजिए आज 

सुबह-सुबह लो राम का नाम,✍️
पूरे होंगे बिगड़े अधूरे काम
राम जिनका नाम है, अयोध्या जिनका धाम है,
ऐसे रघुनंदन को हमारा प्रणाम है।

रामनवमी 2024 (Ram Navami 2024)

✨️


ये मृदुल ऋतु का समय है

एक तरुवर हँस रहा था 

मंजरी के बौर से हर

एक टहनी कस रहा था

भाल पे मोती जड़ा 

जगमग टिकोरों का मुकुट

✨️

चलते- चलते

 सुनिये, सम्भल के बोलिए

वरना नहीं दिक्कत कोई   

बात करना छोड़िये।

आज की तारीख में मँहगा सलीका हो गया

जानते हैं हम, 

✨️

नाॅट फार यूज

 हर प्लीज का, मतलब रिस्पेक्ट नहीं होता

कुछ प्लीज किसी को मजबूर करने के लिए भी

'यूज़ किए जाते..

✨️

पुरस्कार--महात्म्य

अगर मुझसे को पुरस्कार की परिभाषा लिखने को कहे तो वह कुछ इस तरह होगी--"पुरस्कार ऐसा पारस है जो लोहे को भी सोने का रूप देकर चमका देता है . ” पुरस्कार पाकर गुमनामी के पाताललोक में पड़ा नाम अचानक अखबारों में ..

।।इति शम।।

धन्यवाद 

पम्मी सिंह 'तृप्ति'..✍️


7 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर प्रस्तुति
    रामनवमी शुभ हो
    सादर वंदन

    जवाब देंहटाएं
  2. वाकई बेहतरीन रचनाओं की प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  3. शानदार रचनाओं का सुंदर संकलन।
    आपको सपरिवार तथा ब्लॉग के सभी पाठकों को राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

    जवाब देंहटाएं
  4. सुप्रभात। बहुत सुंदर रमणीय अंक। मेरी रचना की पंक्ति भाल पर। बहुत आभार पम्मी जी।
    सभी रचनाकारों को रामनवमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।

    जवाब देंहटाएं

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