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सोमवार, 8 जनवरी 2024

3999 ..मौसम गरम तो वसंत-पंचमी के बाद ही होता है होली तक

 सादर अभिवादन

जनवरी ठण्डी ही होती है
मौसम गरम तो वसंत-पंचमी के
बाद ही होता है होली तक...
होली के बाद तो गरमी कहती है
यहां कोई नहीं 
अब तेरे मेरे सिवा
तुम सब-कुछ
छोड़ कर आ जाओ
अब रचनाएं पढ़िए



श्वास है तो सब है
मन धौकनी की तरह
चलता है तो जग है
हंसना हसाना
मिलना मिलाना
रूठना मनाना
जीवन है तो सब है

"मासूमियत सी है उन ओस की बूंदों में
जो खुशनुमा बना देती हर सर्दी की ये सुबह है..


माह जनवरी मौसम भी सर्द है,
सुबह शाम में धुंध भी बहुत है..
सफर जिंदगी चल रहा है अपने
वेग से,
चेहरे पर हँसी है इसके पीछे मुश्किलें बहुत हैं ..




उत्साह अनंत है गात-गात में
खुश रंग सजा है नव प्रभात में.
मनहर सुखकर शांत प्रकृति
सौन्दर्यमयी है अरुणिम प्राची
कुसुम सुवास है सांस-सांस में
खुश रंग सजा है नव प्रभात में....



पतंग के उसी कोने पे बैठ
दुआ करना तू मेरे हक़ में

सुना है दुनिया बनाने वाला
वहीं रहता है ऊपर आसमान में कहीं …




बढ़े चलो रास्ता मुश्किल ही सही
मंज़िल तक जाती तो है
सपनो में  रंग भरना है तो
संभलकर चलना ही पड़ेगा
मुश्किलें आसान हो जाती है
जब इरादे पक्के हो।




इत्र सी ख्वाबों तरंगें महकाती साँसे खतों की l
गुलदस्ता वो पुराने अघलिखे ख्यालातों की ll

अकेले में खिलखिला दे मुस्कान जो अधरों की l
पहेली वो मेरे चाँद के अनकहे अल्फाजों की ll




मैं नहा-धोकर शंख बजाने को उतावला था।सात बजे से पहले ही पूरी सोसायटी मेरे शंखनाद से दहल गई।
गॉर्ड दौड़ कर मेरे पास आया।उसके पीछे-पीछे वर्माजी थे।नए साल का भी लिहाज नहीं किया।
बिगड़ उठे, ‘भाई,बच्चे नौ बजे तक सोते हैं।आपने उन्हें सात बजे ही उठा दिया।यह नहीं चलेगा।’ 
उन्हें संकल्प के बारे में बताना चाह रहा था पर श्रीमती जी ने बात संभाल ली।
पूर्ण आश्वस्त करके उन्हें भेज दिया।मेरा पहला संकल्प ढेर हो चुका था।




फटते बादल, दरके पर्वत,
झुलसे जंगल !
क्यूँ कुदरत को गुस्सा आया
मत पूछो !


आज बस
कल सखी आएगी
सादर

6 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर हलचल … आभार मेरी रचना को शामिल करने के लिए

    जवाब देंहटाएं
  2. खूबसूरत रचनाओं का सुंदर संग्रह।

    इसमें मेरी रचना को स्थान देने के लिए हार्दिक आभार।

    सभी रचनाकारों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

    जवाब देंहटाएं

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