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शनिवार, 18 सितंबर 2021

3155.. हिन्दी दिवस पखवाड़ा

     


 हाज़िर हूँ...! उपस्थिति दर्ज हो...

"हिन्दी को हम कैसे समृद्ध कर सकते हैं..?"

"आपलोग प्रिस्क्रिप्शन पर दवाइयों का नाम हिन्दी में लिखना शुरू कर दें..। बहुत वर्षों से साध थी कि किसी चिकित्सक से पूछ लूँ कि आप ऐसी भाषा का प्रयोग करते हैं कि केवल दवा का दुकानदार ही पढ़ पाता है रोगी नहीं..? आज चिकित्सकों की भीड़ से ही पूछ रही हूँ..।"

"अर्थात?"

"आंग्लभाषा से मुझे प्रत्यूर्जता नहीं... अब आपलोगों को प्रत्यूर्जता से ही प्रत्यूर्जता है तो क्या किया जा सकता है...?"

"सरल सहज भाषा में समझाने का कष्ट करें...,"

"अब man go और mango तथा अंकल आँटी जैसी इतनी सरल कृपण/सूम भाषा हिन्दी तो हो ही नहीं सकती...!"

”हिन्दी में बात करें, हिन्दी की बात ना करें।.. हिन्दी एक वैज्ञानिक भाषा है। वैज्ञानिक होने के कारण ही यह बाचन एवं लेखन की दृष्टि से एक क्रमबद्ध भाषा भी है..,"

"विज्ञान की पुस्तकें हिन्दी में कितनी है?"

हर सुबह आपनी ख्वाहिशों को लेकर जगा कर,

सफलता का दीप जलाया कर,आलस्य  भगा कर

किसी न किसी रुप में आलस्य आकर हमें सताएगा।

हमारे कार्यो में रुकावट डाल कर हमारी उन्नति के

मार्ग को अवरूद्ध कर हमें भ्रमाएगा।

सच कहूँ तो यहीं आलस्य का फ़साना हैं,

परीक्षा और नींद दोनों को एक साथ आना हैं

आलस्य नाम का यह अवगुण भले ही एक प्रतीत होता हो

लेकिन अपने आप में कई दुर्गुण समेटे हुए है

जैसे- आलसी व्यक्ति काम करने से बचने के लिए झूठ बोलेगा ,

चोरी करेगा और शायद हेरा-फेरी भी करेगा ।

गाँवों की हरियाली और मनोरमता तन – मन के

कलुष तथा आलस्य को हर लेती है। वहाँ की शीतल मंद बयार में

प्रेम, सद्भावना व संवेदना की लहर बहती है। गाँवों के त्योहारों और धार्मिक

कर्मों में भारतीय परंपरा की समरसता समाहित है

इसी तरह रात दिन आलस्य में पड़कर हर दिन तुम गवाते जा रहे हो।

इस मानव जीवन को अति बहुमूल्य बताते हुए कबीर कहते हैं

कि यह जन्म हीरे के समान अनमोल था ।

कुटिलत संग रहीम कहि साधू बचते नाहि

ज्यों नैना सैना करें उरज उमेठे जाहि ।

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पुन: भेंट होगी....

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4 टिप्‍पणियां:

  1. जीवन शैली का एक विकार है आलस्य ।
    मनुष्य का निकटवर्ती शत्रु है आलस्य।।
    सुबह का अमूल्य समय जो सो कर हैं गंवाते।
    वह जीवन में कभी भी तरक्की की सीढी नहीं चढ़ पाते।।
    बेहतरीन
    आभार
    सादर नमन

    जवाब देंहटाएं
  2. आलस्य वो शोख साथी है जिसके संगति में हम अपना सब कुछ गंवा देते है।
    हर पक्तिं सटीक एवं सार्थक ।

    जवाब देंहटाएं
  3. इस मानव जीवन को अति बहुमूल्य बताते हुए कबीर कहते हैं
    कि यह जन्म हीरे के समान अनमोल था
    ज्यों नैना सैना करें उरज उमेठे जाहि
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    जवाब देंहटाएं

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