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शनिवार, 2 मई 2020

1751... वेदना

चित्र में ये शामिल हो सकता है: 1 व्यक्ति, वह संभावित टेक्स्ट जिसमें 'ये ख़्वाहिश हों बड़े मशहूर दुनिया भर में है एक रोग... सच पूछो तो मैं इससे सदा आज़ाद रहना चाहता हूँ एक वो दुनिया जहाँ मशहूर होने का कोई मतलब नहीं और हो मज़ा जीवन के अनुभव में बस इतना सा मेरा है ख़्वाब नन्हा सा इरफ़ान ख़ान सलिल वर्मा 30 04 2020' लिखा गया है

वेदना

यूं ही नहीं ताकता नारी मन,नीलम बादल चंद्रमा में
पाती खुद को उन दोनों में,सजल नैन शीतलपन में।
मन प्रबल पर इच्छा रखती,तुड़े-मुड़े से काग़ज़ सी
बीच भंवर में डूबे नौका, जैसे कश्ती काग़ज़ की।



कहना भी अगर कुछ चाहूँ तो
कुछ भी कह न पाता हूँ
सब कहते है की तेरा दिल था छोटा
पर शायद अपना भाग था खोटा


चढ़कर मेरे जीवन-रथ पर
प्रलय चल रहा अपने पथ पर
मैंने निज दुर्बल पद-बल पर
उससे हारी-होड़ लगा

सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष

मुसीबतें तो आएंगी मगर डरने का नहीं
डोर जिसके हाथों में है डालेगा वही नई
सदा हमारी बातों पर चर्चाएं चलेंगी नई
मुसीबतें तो आएंगी मगर डरने का नहीं
कैंची सीखने में सहायक साईकिल नई
सफलता मंजिल नहीं यात्रा होती है नई
मुसीबतें तो आएंगी मगर डरने का नहीं

लघुकथा दुनिया

संकलन: द्वितीय ऑनलाइन लघुकथा गोष्ठी | आयोजक: लघुकथा शोध केंद्र, दिल्ली | संकलन: लघुकथा दुनिया


साहित्य की साधना ही प्रेम की सच्ची पूजा है।

मिले जब अपनों से आघात
न करना तुम कोई प्रतिघात
बनेगी बिगड़ी हर इक बात
संभालो बस अपने जज्बात

चले आओ चले आओ, सुस्वागतम



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पुन: मिलेंगे
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एक सौ अट्ठारहवाँ विषय
शोहरत
उदाहरण
कितना बेबस कर देती है शोहरत की जंजीरे भी 
अब जो चाहे बात बना ले हम इतने आसान हुए 
- डॉ. राही मासूम रजा
पूरी रचना पढ़िए
प्रेषण तिथिः 02 मई 2020
प्रकाशन तिथिः 04 मई 2020
माध्यम ब्लॉग संपर्क फार्म



7 टिप्‍पणियां:

  1. हमेशा की तरह बहुत अच्छी रचनाओं का संग्रहणीय संकलन है दी।
    बहुत सुंदर प्रस्तुति।
    सादर प्रणाम।

    जवाब देंहटाएं
  2. सदाबहार प्रस्तुति..
    सादर नमन..

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत खूबसूरत प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  5. मेरी रचना की छोटी सी बूंद को कविता के महासागर में शामिल करने के लिए कोटि कोटि धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं

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