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गुरुवार, 26 मार्च 2020

1714...विश्वास और अंधविश्वास के बीच...


सादर अभिवादन।

               21 दिन की तालाबंदी (लॉक डाउन) का पहला दिन गुज़रने को है। लाचार एवं साधनहीन वर्ग की कुछ परेशानियाँ मीडिया के माध्यम से बाहर आ रहीं है जिन्हें सरकार अपनी क्षमता और कौशल के अनुसार नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। चीन,इटली,स्पेन,ईरान,अमेरिका के बाद अब भारत में कोरोना वायरस के विस्तार की संभावना और आशंका चिंताजनक है। सरकारी प्रयासों में हरेक नागरिक सहयोग करे और अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार पीड़ित मानवता की सेवा में योगदान करे तो यह भयावह महामारी भारत से भी गुज़र जाएगी। 
राहत की बात है अब भारत में कोरोना वायरस की जाँच किट समस्त तकनीकी एवं प्रशासनिक मानदंडों को पास करते हुए मरीज़ों की जाँच के लिये पिछले 6 हफ़्तों के अथक प्रयासों से तैयार कर ली गयी है जिसकी क़ीमत विदेश से आयातित किट से मात्र एक चौथाई है अर्थात यदि विदेशी किट की क़ीमत 100 रूपये है तो हमारी स्वदेशी किट 25 रूपये में उपलब्ध है। 
इस समय अंधविश्वास और पाखंड को पूरी तरह नकारा जाना चाहिए क्योंकि देश की धर्मभीरु जनता को ठगने और डराने का कुछ स्वार्थी तत्त्व भरसक प्रयास कर रहे हैं। 
गौ-मूत्र और गोबर को मैं ज़्यादा अच्छी तरह समझता हूँ इनकी सामाजिक उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता किंतु हर मर्ज़ की दवा के रूप में इन्हें प्रस्तुत करने वाले नोबेल पुरस्कार समिति को अपनी उपलब्धि बतायें और विश्व कल्याण के लिये इनकी उपयोगिता सिद्ध करें। मैंने इंसानी मल-मूत्र के अलावा पशुओं के मल-मूत्र को भी जाँचा है। इनमें बीमार इंसान या पशु के मल-मूत्र में अनेक जानलेवा बैक्टीरिया, वायरस, कृमि, पस, यूरिया, क्रिएटिनिन, प्रोटीन्स, यीस्ट आदि पाये जाते हैं। अब ज़रा सोचिए आपको किस गाय का मूत्र उपलब्ध कराया गया है सेवन के लिये। कितनी मात्रा में सेवन करना है कुछ नहीं पता। शायद पहली बार किसी अत्यंत प्यासे व्यक्ति ने जान बचाने के लिये गौमूत्र का सेवन किया हो और उसे कोई विशेष राहत मिली होगी तो सामने ऐसे उदाहरणों को देखकर लोग उन्हें अपनाने लगते हैं। मैं गौमूत्र पर 2017-2018 में अपने एक रिश्तेदार के माध्यम से अध्ययन कर रहा था। उनका लिवर 85% ख़राब हो चुका था। पेट में पानी भर जाता था। हर महीने पेट का पानी (Ascetic Fluid) निकलवाते और एल्ब्यूमिन के इंजेक्शन लगते रहते। उन्होंने लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह को नकार दिया, दवाएँ लेना भी बंद कर दीं और एक छोटी बछिया का मूत्र एकत्र करते; दिन में दो बार ताज़ा गौमूत्र का सेवन करते। आश्चर्यजनक रूप से उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ। पेट में पानी भरना बंद हो गया और वे सामान्य जीवन जीने लगे। मुझे उत्सुकता हुई तो उनसे मिलने दिल्ली से इटावा पहुँचा तो उनके शरीर में हुए परिवर्तन देखकर मुझे गौमूत्र की चिकित्सीय उपयोगिता पर अध्ययन करने का ख़याल आया। उन्होंने ताज़ा एकत्र हुआ गौमूत्र और बाज़ार में मिलने वाले पैक गौमूत्र में अंतर भी बताया कि ताज़ा गौमूत्र बहुत तीखा होता है जबकि बाज़ार में मिलने वाला पानी की तरह। लगभग दो साल में केवल गौमूत्र के सेवन से वे सामान्य जीवन बिता रहे थे कि घर के बाहर हाई-वे पर खड़े थे वहाँ एक वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी और वे अब इस दुनिया में नहीं हैं। बहुत अफ़सोस हुआ। मैंने उनसे पूछा था कि आप कैसे गौमूत्र पी जाते हो तो उन्होंने कहा था- इंजेक्शन, पानी निकलवाना और दवाइयों से बेहतर इसी को हलक से उतार लेता हूँ।
मेरा यह प्रसंग अंधविश्वास को पुष्ट करने के लिये नहीं है बल्कि गौमूत्र पर एक व्यापक वैज्ञानिक शोध का आग्रह करता है ताकि स्पष्ट हो सके कि गौमूत्र में ऐसे कौन-कौन से तत्त्व हैं जो लिवर को स्वस्थ बना देते हैं। 
2010 में जर्मनी में जानलेवा डायरिया के मामले ज़्यादा बढ़े तो वहां वैज्ञानिकों ने पाया कि खीरा उगाने वाले किसान ताज़ा गोबर खेतों में डालते हैं जिससे उसमें उपस्थित ई.कोलाई बैक्टीरिया खीरों पर चिपका हुआ घर / होटल / रेस्त्रां तक पहुँच रहा था।
-रवीन्द्र सिंह यादव 
आइए अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें-
लोग स्वस्थ होने लगे
उनके बिना जो थे नासमझ
ख़तरनाक़, अर्थहीन, बेरहम
और समाज के लिए खतरा।
फिर ज़मीं के जख्म भी भरने लगे
और जब खतरा खत्म हुआ
लोगों ने एक दूसरे को ढूँढा
मिलकर मृत लोगों का शोक मनाया 







श्वास रहित है तन पिंजर
साथ सखी देती ताने।
तड़प मीन की मन मेरे
श्याम नही अंतर जाने ।।

बिना चाँद चातक तरसे





हवा शुद्ध होगी परिसर की 
धुँआ छोड़ते वाहन ठहरे,
पंछी अब निर्द्वन्द्व उड़ेंगे 
आवाजों के लगे पहरे !




रांड़  ,सांड़ 
सीढ़ी ,सन्यासी 
सबको यह अपनाती है,
शंकर को 
अद्वैतवाद का 
अर्थ यही समझाती है,



21 days lock down

एक तो करेला ऊपर से नीम चढ़ा। एक हफ्ते से अवसाद ग्रस्त 2020 के कबीर सिंह बने मिश्रा जी, घर आने वाला गाना सुनकर और भड़क गए। धर्मपत्नी के फोन उठाते ही उन्होंने चिल्लाना शुरू कर दिया। 
"ये क्या गाना लगा रखा है तुमने, सब कुछ बंद है तो कैसे घर आऊँ।"
"अरे खिसिया काहे रहे हैं, हम थोड़े ना बंद किये हैं। हमरे दिल के दरवाजा आपके लिए हरदम खुला है।"


हम-क़दम का 113 वाँ विषय
'काजल'
रचना भेजने की अंतिम तिथिः  28 मार्च 2020
प्रकाशन तिथिः 30 मार्च 2020

आज बस यहीं तक 
फिर मिलेंगे अगले गुरूवार। 

रवीन्द्र सिंह यादव

12 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  2. गौ-मूत्र सहित भूमिका एवं रचनाएँ सराहनीय है।
    अपने इस छोटे से शहर का हालभी बुरा है।

    लॉक डाउन के पहले दिन शहर के कुछ तिराहे और चौराहों पर पुलिस का एक्स्ट्रा खौफ़ देखने को मिला। नये रंगरूटों की ड्यूटी लगी हुई थी। जो शेर-बकरी को एक घाट का पानी पिलाने के दिखावे में जरूरतमंद लोगों तक को अपमानित करने से नहीं हटे। यहाँ तक कि समाचरपत्र विक्रेताओ को वे कोरोना वायरस का मित्र बता कर भगा ही नहीं रहे थे, वरन् अपशब्दों का भी प्रयोग कर डंडा फटकार रहे थें। इसी तरह एक दुग्ध बेचने निकले लोगों की साइकिल पर दो -चार डंडा चलाकर कुछ इसतरह से का व्यवहार उनके साथ करते कि भय से उसका चेहरा पीला पड़ जा रहा था। नई उम्र के पुलिस वालों ने हॉकरों को गाय-गोरु की तरह दौड़ा- दौड़ा कर हांक दिये जाने वाली बात जिलाधिकारी तक पहुँची कि हाँकरों को पुलिस सुबह-सुबह का नाश्ता अपशब्द एवं डंडे से दे रही है तो उन्होंने
    पुलिस को ऐसा न करने का इंस्ट्रक्शन दे दिया गया है ।
    बस अब राम-राम।

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  3. व्वाहहहह
    घर से बाहर अस्पताल में कैद
    रहते हुए भी शानदार प्रस्तुति
    साधुवाद..
    सादर..

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  4. अभी बहुत नाजुक और भयावह समय गुजर रहा है
    अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखेंगे

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  5. बेहतरीन व सम-सामयिक प्रस्तुति
    आभार आपका
    सादर

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  6. वाह!,रविन्द्र जी ,खूबसूरत भूमिका और सुंदर रचनाएँ ।
    अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखिएगा ।

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  7. सार्थक भूमिका के साथ विविधरंगी रचनाओं की खबर देता सुंदर संकलन, आभार !

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  8. सभी रचनाएँ शानदार। मेरी रचना को स्थान देने के लिए विशेष आभार।

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  9. बहुत उपयोगी भूमिका! सार्थक सटीक भ्रम निवारण करती
    बहुत अच्छी भूमिका।
    सभी रचनाएं बहुत सुंदर।
    सभी रचनाकारों को बधाई।
    मेरी रचना को शामिल करने केलिए हृदय तल से आभार।

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  10. आदरणीय रवीन्द्र जी , अस्पताल में अपने कर्तव्य निर्वहन के साथ सुंदर, सारगर्भित , उपयोगी भूमिका के साथ ये सार्थक प्रस्तुति साहित्य और पांच लिंकों के प्रति आपकी गहरी निष्ठा को प्रदर्शित करती है | जहाँ किसी बिमारी की आहात होती है उससे पहले उसके लिए घरेलू नुस्खे आ जाते हैं |एसा नहीं ये कारगर नहीं पर किसी गंभीर स्थिति के लिए कोई कारगर उपचर ही दरकार है | बहुत अच्छा लिखा आपने | सभी लिंक तो हैं ही शानदार| सभी रचनाकारों को बधाई और शुभकामनाएं| आपको भी इस श्रमसाध्य अंक के लिए बधाई | दूसरों के साथ अपना भी ख्याल जरुर रखिये | सकुशल रहें , स्वस्थ रहें यही कामना है | सादर

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  11. गौमूत्र लाभकारी है पर स्वस्थ देशी गाय का....।
    सुन्दर सार्थक भ्रमनिवारक भूमिका के साथ शानदार प्रस्तुतीकरण उम्दा लिंक संकलन।

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  12. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति | आपका हार्दिक आभार

    जवाब देंहटाएं

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