---

सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

1319.....क़रार (हम-क़दम का उनसठवाँ अंक)

सादर अभिवादन। 

क़रार अर्थात चैन, शाँति, अनुबंध।
जीवन में क़रार चाहे जी को क़रार देनेवाला हो 
अथवा दो पक्षकारों के बीच क़रार (अनुबंध)..... 
दोनों रूपों में अपनी अहमियत से हमें 
प्रभावित करता है। 
आदरणीया यशोदा अग्रवाल जी द्वारा चयनित 
इस विषय पर आपने अपनी रचनात्मक 
सक्रियता के ज़रिये 
हमारे अंक को सारगर्भित बना दिया है।  
क़रार विषय पर लीजिए प्रस्तुत है 
नियमित सोमवारीय प्रस्तुति
 जिसमें शामिल हैं रचनाकारों के विभिन्न दृष्टिकोण। 
रचनाधर्मिता की विशिष्ट छाप प्रस्तुत करता हम-क़दम का ताज़ातरीन अंक आपकी सेवा में हाज़िर है -   
(रचनाएँ जिस क्रम में प्राप्त हुईं हैं उसी क्रम में उन्हें यहाँ प्रदर्शित किया गया है।)
क़रार
----


 ग़ुम  हुआ   क़रार -ए -जिंदगी 
ज़माने की आबोहवा में 
मोहब्बत की गहराइयों में  डूब  गया  ग़म
सुकूं  की  तलाश  में  |

क़रार -ए - जंग  छिड़ी 
मोहब्बत  के  बाज़ार   में 
सुकूं -ए - तलब 
मिला  ग़मों  के  दरबार   में |



करार  न था दिल को
ज्यों ज्योँ समाचार आगे बढे
दिल दहलाने वाली ख़बरें
थमने का नाम न लेतीं  |
मां ने अपना बेटा खोया  
उसकी गोद उजड़ गई
बहन ने अपना भाई
अब  राखी किसको बांधेगी|
पत्नि की मांग उजड़ गई 



यूँ तो न जाने कितने करार करते हैं
कोशिश भी  हैं उन्हें  निभाने की
पर अक्सर सफल नहीं हो पाते
बीच में ही कहीं भटक जाते हैं
भूल जाते हैं  पूरा न करने के लिए
हजार बहाने बनाते हैं
फिर घबरा कर मोर्चा छोड़ जाते हैं
सारे करार धरे रह जाते हैं



भीगी है ये, आँखें क्यूँ,
यूँ फैलाए है पर, आसमां पे क्यूँ,
ना तू, इस कदर मचल,
आ जा, जमीं पे साथ चल,
मुझ पे कर ले, ऐतबार!

ऐ बेकरार दिल, खो रहा है क्यूँ तेरा करार?
क्यूँ तुझे हुआ है, फिर किसी से प्यार?



तुम्हारा प्रतिबिम्ब देख कर ही
अपने मन को समझा लूँगी !  
बस तुम एक बार आ जाओ
मन की बेकली
किसी तरह तो शांत हो
बेकरार दिल को  
किसी तरह तो करार आये !


क़रार जिनसे था , थी बे-क़रारी
झुकी नज़रों में थी,किस्मत हमारी
कहा था जो,किसी ने सुनाते रहेंगे
ताउम्र वो लफ्ज़, तेरी जिंदगी के
दोस्ती से आगे , हममें क्या न था
लबों पे मुस्कान, मयखाना तो न था



तब रुको नहीं
डरो नहीं
उम्मीद का दामन 
थाम कर उजाले 
की ओर कदम बढ़ा
परिस्थितियां
विपरीत हो चाहें
रास्ते में हों बाधाएं
मन को करार न आए
 दिल घबराने लगे



वो
वीर
शहीद
खोया-लाल
स्तब्ध मां-बाप
बुत बनी पत्नी
कैसे पाएं करार

सभी रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ।
सादर आभार।  
हम-क़दम के साठवें अंक का विषय मंगलवारीय प्रस्तुति में घोषित किया जायेगा।  

रवीन्द्र सिंह यादव    

17 टिप्‍पणियां:

  1. धड़कनें हैं, तेज क्यूँ,
    अन्तरमन तेरा, निस्तेज क्यूँ,
    लड़खड़ाए से कदम,
    छूट जाए न, कहीं तेरा दम,
    एक, तू ही है मेरा यार!

    विषय को प्रमुखता से उठाती प्रस्तुति, प्रणाम।
    पथिक को भी स्थान देने अके लिये धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  2. शुभ प्रभात...
    था हुआ इक..
    क़रार...
    दोनों के बीच
    नहीं करेंगे वार..
    इक दूसरे पर..पक्का
    था इकरार...फिर भी
    कर दिया वार..कंधे
    दूसरे के थे...पर
    इशारा उन्हीं का था..
    बेहतरीन रचनाएँ
    सादर...

    जवाब देंहटाएं
  3. शुभ प्रभात आदरणीय
    बहुत ही सुन्दर हमक़दम की प्रस्तुति 👌| शानदार रचनाएँ |
    सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनायें |
    मुझे हमक़दम स्थान में स्थान देने के लिए तहे दिल से आभार|
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  4. बेहतरीन रचनाएं सुंदर प्रस्तुति सभी रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार रवीन्द्र जी

    जवाब देंहटाएं
  5. शुभ-प्रभात
    बेहतरीन रचना संकलन एवं प्रस्तुति, सभी रचनाएं उत्तम,मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका सहृदय आभार आदरणीय 🙏🙏

    जवाब देंहटाएं
  6. आभारी हूँ हलचल और सहभागी लेखकों व पाठकों का। अभिनंदन आभार।

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर संकलन सुन्दर प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  8. उम्दा संकलन |एक ही विषय पर अलग अलग सोच पर लेखन बहुत अच्छी लगता है |मेरी रचनाओं को सम्मिलित करने के लिए धन्यवाद |

    जवाब देंहटाएं
  9. प्रभावी भूमिका सहित सुन्दर संकलन ।

    जवाब देंहटाएं
  10. बेहतरीन प्रस्तुति सभी रचनाकारों को बधाई ।

    जवाब देंहटाएं
  11. हमकदम का यह संकलन बहुत ही अनूठा एवं अप्रतिम ! सभी रचनाकारों की रचनाएं अत्यंत सुन्दर एवं हृदयग्राही ! मेरी रचना को आज की हलचल में स्थान देने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार रवीन्द्र जी ! सभी साथी रचनाकारों का दिल से अभिनन्दन एवं सभीको हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !

    जवाब देंहटाएं
  12. बहुत सुंदर संकलन, सभी रचनाएँ उम्दा
    रचनाकारों को बधाई धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  13. शानदार प्रस्तुतिकरण ...करार पर बहुत ही सुन्दर रचनाएं....सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई।

    जवाब देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।