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बुधवार, 5 दिसंबर 2018

1237..क्या है ये हरबार अपने दरम्याँ..


।।भोर वंदन।।

मधु प्रात ! मुक्त नभ में सस्मित

नाचती धरित्री मुक्त पाश!

रवि शशि केवल साक्षी होते

अविराम प्रेम करता प्रकाश!

मैं झरता जीवन डाली से

साह्लाद,शिशिर का शीर्ण पात!

फिर से जगती कानन में
आ जाता नवमधु का प्रभात!
   - सुमित्रानंदन पंत
इसी मधुर प्रभात से नज़र डाले निम्न रचनाओं पर..✍
🍃
आदरणीय दिग्म्बर नासवा जी की गज़ल गोई से..

क्यों जुड़े थे तार अपने दरम्याँ
था नहीं जब प्यार अपने दरम्याँ
रात बोझिल, सलवटें, खामोश दिन
बोझ सा इतवार अपने दरम्याँ
प्रेम, नफरत, लम्स, कुछ तो नाम दो
क्या है ये हरबार अपने दरम्याँ..
🍃
आनंद लिजिए 
आदरणीया ज्योति देहलीवाल जी
 के व्यंग- 

मैडम जी, मैं ‘सिक्स डेज वीक’ पर ही काम करुंगी...!!!
मुझे काम वाली बाई रखना था तो इस बारे में सोसायटी के वॉचमन से बात करने पर उसने एक कामवाली बाई को भेजा। मैं ने सोचा कि काम पर लगाने से पहले उससे सब बातें तय कर लूं जैसे कि क्या महिना लेगी...कितने बजे आएगी...
🍃

अपर्णा त्रिपाठी जी की रचना..

बचपन से एक ही सपना था, बडा होकर विदेश 
जाऊंगा, खूब पैसा कमा कर मै भी बडा आदमी 
बनूंगा।बचपन से बडा होने तक बहुत कुछ सीखा, 
बहुत कुछ बदला मगर बडा आदमी बनने की 
परिभाषा नही बदली। और इसी ललक ने मुझे विदेश 
में अच्छी नौकरी अच्छा पैसा दिलाया। 
🍃


आदरणीया अनुराधा चौहान जी की रचना..


जब तक जीवन

चलता जाए

साया साथ न छोड़ें

जाने कितने रूप रंग में

जीवन में रंग जोड़े

पैदा होते ही मिला मुझे
माँ के आंचल का साया
🍃

आदरणीया मीना शर्मा जी की खूबसूरत गजल से 
मैं यहीं थमती हूँ.. कल फिर नई प्रस्तुति के साथ..


बंदिश लबों पे, लफ्जों पे पहरे बिठा दिए
अश्कों की हद में जख्म कुछ गहरे बिठा दिए।


है फासिला सदियों का हकीकत औ' ख्वाब में
अच्छा किया जो ख्वाब सुनहरे मिटा दिए।

........
हम-क़दम के अड़तालिवें अंक का विषय
यहाँ देखिए


।।इति शम।।

धन्यवाद

पम्मी सिंह 'तृप्ति'...


15 टिप्‍पणियां:

  1. क्यों जुड़े थे तार अपने दरम्याँ
    था नहीं जब प्यार अपने दरम्याँ

    इन खूबसूरत पंक्तियों के लिये हृदय से आभार, सभी को इस पथिक का प्रणाम। ठंड में चौराहा उदास है। हाँ ,इससे बेखबर एक शख्स रिक्शे पर सोया है, बिल्कुल चैन की नींद,खुले आसमान के नीचे चादर लपेटे।

    जवाब देंहटाएं
  2. शुभ प्रभात सखी..
    बेहतरीन रचनाएँ पढ़वाई...
    दिगम्बर जी की रचना उम्दा है...
    आभार...
    सादर..

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत मोहक पंत जी की कविता के साथ सुंदर शुरुआत पम्मी जी आकर्षक विविधता लिये सुंदर संकलन ।
    सभी रचनाकारों को बधाई ।
    अंक बहुत अच्छा लगा।

    जवाब देंहटाएं
  4. बेहतरीन प्रस्तूति। मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, पम्मी दी।

    जवाब देंहटाएं
  5. सुंदर प्रस्तुति शानदार रचनाएं सभी रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद पम्मी जी

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर भूमिका के साथ बेहद उम्दा रचनाओं का सारगर्भित संकलन पम्मी जी।
    एक संग्रहणीय अंक की बधाई स्वीकार करें।
    सादर।

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत शुक्रिया आदरणीया पम्मी जी, इन सुंदर रचनाओं के संकलन में मेरी रचना को शामिल करने हेतु।

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर संकलन , सभी रचनाएँ एक से बढ़ कर एक हैं

    जवाब देंहटाएं
  9. सुन्दर संकलन, सुन्दर प्रस्तुति,सभी रचनाकारों को बधाई

    जवाब देंहटाएं
  10. बहुत ही अच्छी हलचल प्रस्तुति 👌

    जवाब देंहटाएं

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