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मंगलवार, 20 मार्च 2018

977....केवल हिन्दुूवर्ष क्यों

जय मां हाटेशवरी....
कुछ अजीब सा लगता है......
भारतीय  नव वर्ष आगमन पर....
सब एक दूसरे को याद दिलाते हैं.....
भई आज नव वर्ष है.....
कुछ तो इसे  हिन्दू वर्ष  कहकर नकार देते हैं....
पर हम तो 1 जनवरी को भी....आनंद के साथ मनाते हैं.....
हमने तो कभी नहीं कहा.....इसाई नव-वर्ष इसे.....
पर जब हमे आवश्यक्ता पड़ती है.....
किसी शुभमहुरत की अर्थात शादी-विवाह तिथि, कोई मांगलिक कार्य करने की....
तो काम आती है....यही पद्धति....
 चैत्र के महीने के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि (प्रतिपद या प्रतिपदा) को सृष्टि का आरंभ हुआ था। हमारा नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को शरू होता है| इस दिन ग्रह और नक्षत्र मे परिवर्तन होता है | हिन्दी महीने की शुरूआत इसी दिन से होती है | अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 18 मार्च को भारतीय  नव वर्ष २०७५ की शुरुवात हो चुकी है। | हिन्दू नव वर्ष के इस पावन पर्व पर सभी   देशवासियों को बहुत बहुत बधाई |

नए पत्ते आते है वृक्ष खुशी से झूम जाते हैं
ऐसे मौसम में ही तो नया आगाज़ होता हैं
हम यूँही हैप्पी न्यू ईयर नहीं मनाते हैं
नौ दुर्गा के आगमन से सजता हैं नव वर्ष
गुड़ी के त्यौहार से खिलता हैं नव वर्ष
कोयल गाती है नववर्ष का मल्हार
संगीतमय सजता प्रकृति का आकार
चैत्र की शुरुवात से होता नव आरंभ
यही हैं भारतीय  नव वर्ष का शुभारम्भ
भारतीय  नव वर्ष की शुभकामनायें
अब देखिये आज के लिये मेरी पसंद....




केवल हिन्दुूवर्ष क्यों
ओ भारत के वासियों, मन को करो उदार।
केवल हिन्दू वर्ष क्यों, इसको रहे पुकार।।
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पंथ भिन्न तो क्या हुआ, सबका है ये देश।
सम्वत्सर से चमन में, उन्नत हो परिवेश।।
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नवसम्वत्सर आ गया, गया पुराना साल।
नूतन आशाएँ जगीं, सुधरेंगे अब हाल।।
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नौ दिन के ही लिए क्यों, करते पूजा-जाप।
प्रतिदिन पूजा-पाठ से, कटते संकट-ताप।।



काल गणना - विक्रम और शक संवत - एक चर्चा / विजय शंकर सिंह

द्वादश माह के वर्ष एवं सात दिन के सप्ताह का आग़ाज़ विक्रम संवत से ही आरम्भ हुआ। विक्रम संवत में दिन, सप्ताह और मास की गणना सूर्य व चंद्रमा की गति पर निश्चित की गई। यह काल गणना अंग्रेज़ी कैलेंडर से बहुत आधुनिक और विकसित प्रतीत होती है। इसमें सूर्य, चंद्रमा के साथ अन्य ग्रहों को तो जोड़ा ही गया,साथ ही आकाशगंगा के तारों के समूहों को भी शामिल किया गया, जिन्हें नक्षत्र कहा जाता है। एक नक्षत्र चार तारा समूहों के मेल से निर्मित होता है, जिन्हें नक्षत्रों के चरण के रूप में जाना जाता है। कुल नक्षत्र की संख्या सत्ताईस मानी गयी है, जिसमें अट्ठाईसवें नक्षत्र अभिजीत को शुमार नहीं किया गया। सवा दो नक्षत्रों के समूहों को एक राशि माना गया। इस प्रकार कुल बारह राशियां वजूद में आईं, जिन्हें बारह सौर महीनों में शामिल किया गया।पूर्णिमा पर चंद्रमा जिस नक्षत्र में गतिशील होता है,
उसके अनुसार महीनों का विभाजन और नामकरण हुआ है। सूर्य जब नई राशि में प्रविष्ट होता है वह दिवस संक्रांति कहलाता है। पर चूँकि चंद्रवर्ष सूर्यवर्ष यानि सौर वर्ष से ग्यारह दिवस,तीन घाटी, और अड़तालीस पल कम है, इसीलिए हर तीन साल में एक एक मास का योग कर दिया जाता है, जिसे बोलचाल में अधिक माह,मल मास या पुरूषोत्तम माह कहा जाता है।


माँ हृदय की झंकार में -
चेतना जागृत करो माँ
इस पतित संसार में.
आस्था का एक दीपक
द्वार तेरे रख दिया
ज्योति अंतर्मन जली
उल्लास, मन ने चख लिया
शक्ति का आव्हान करके
पा लिया ओंकार में. 
माँ बसी हो, तुम हृदय की
साज में, झंकार में
पाप फैला है जगत में
अंत पापी का करो
शौर्य का पर्याय हो, माँ
रूप काली का धरो
जन्म देती, जगत जननी
बीज को आकार में.
माँ बसी हो, तुम हृदय की
साज में, झंकार मे


कविता कृष्‍णपल्‍लवी की कविताएं
नगर द्वार पर बर्बरों की प्रतीक्षा करते
डरे हुए लोगों ने शाम ढले
वापस लौटकर पाया कि
बर्बरों के गिरोह शहर में
पहले से ही मौजूद हैं।
आश्‍चर्य के साथ उन्‍होंने पाया कि
धीरे-धीरे अपनी संख्‍या और आक्रामक क्षमता बढ़ाते
बैक्‍टीरिया की तरह वे उनके बीच
पहले से ही अपनी जड़ें मजबूत कर रहे थे
और उनकी सरगर्मियाँ लगातार जारी थीं
और अब वे खुलकर अपने मंसूबों को
अंजाम दे रहे हैं
बाहरी बर्बरों को भी न्‍यौतते हुए
और फिर भी शान्ति, बंधुत्‍व, न्‍याय
और प्रगति की बातें करते हुए।


चैत आ गया .....
सुबह शाम हल्‍की ठंड और दि‍न गरमाया सा लगे, मंदि‍रों और बरगद के नीचे से जब चैता की स्‍वरलहरि‍यां कानों से टकराए..'' रसे-रसे बहे जब पवनमा/ हो राम बीतल फगुनमा..
तो समझि‍ए चैत आ गया।

 चैत माह चि‍त्‍त को सुकून देता है। फागुन जि‍या में टीस उठाता है, पर चैत जैसे सांझ को बैलगाड़ी में टुनटुन करती घंटि‍यों के साथ घर लौटने का अहसास है। रबी फसल से लदकर बैलगाड़ी जब घर आए,  अंगना में गि‍रे पत्‍तों को हवा बुहार ले जाए, रमुआ का बेटा जब गलि‍यों में साईकि‍ल का चक्‍का घुमाए और बच्‍चे राहड़ के दाने
पीट-पीट छि‍नगाए तो समझना चैत आ गया।

हम-क़दम 
सभी के लिए एक खुला मंच
आपका हम-क़दम ग्यारहवें क़दम की ओर
इस सप्ताह का विषय है
:::: एहसास ::::
:::: उदाहरण ::::
छुपा लेती अपने हृदय की वेदना,
जब लू या ठंड का झोंका तुम्हें
हिला जाता।
शायद कभी एहसास हो तुम्हें, कि
कितना कठिन होता, अपने जिगर
का टुकड़ा किसी को सौंपना
व अपनी अमानत उसकी
झोली में डालना।

आप अपनी रचना शनिवार 24  मार्च 2018  
शाम 5 बजे तक भेज सकते हैं। चुनी गयी श्रेष्ठ रचनाऐं आगामी सोमवारीय अंक 26 मार्च 2018  को प्रकाशित की जाएगी । 
इस विषय पर सम्पूर्ण जानकारी हेतु हमारे पिछले गुरुवारीय अंक 
11 जनवरी 2018  का अवलोकन करें



धन्यवाद।



8 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात कुलदीप भाई
    बेहतरीन रचनाएँ चुनी आपने
    आभार
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. उत्तम! बहुत सुंदर प्रस्तुति हिंदी नव वर्ष कि विडम्बना जो हमे अपने बच्चों को भी याद दिलाना पडता है और वो उसे बहुत साधारण ढ़ग से लेते हैं जैसे वो तो नव वर्ष मना चुके 1जनवरी को खैर
    सभी रचनाकारों को बधाई सभी रचनाऐं सुंदर पठनीय

    जवाब देंहटाएं
  3. सार्थक लिंकों के साथ सुन्दर प्रस्तुति।
    आभार आपका।

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह!!शानदार लिंकों के साथ सुंंदर प्रस्तुति ।

    जवाब देंहटाएं
  5. सुंंदर लिंकों का संयोजन..
    बहुत बढिया
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  6. नया साल आदमी का अगर हो जायेगा
    हाथ में मलने के लिये क्या रह जायेगा?

    सुन्दर प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं

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