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बुधवार, 5 जुलाई 2017

719.. नायाब हैं हर इक की...

५ जुलाई २ ० १ ७ 

 ।। जय भास्कर ।। 

नमस्कार एवम् शुभेच्क्षा,

विचारों की अभिव्यक्ति शाब्दिक प्रयोजन से अच्छी
 कुछ नहीं,
जो कही अनकही
 बातों और विचारों की सारगर्भिता
  बयान कर जाती...

ये कला हैं ...
' नायाब है हर इक की अंदाज़- ए- बयान '

तो फिर चलिए..
आज हम सभी इन लिकों के माध्यम से रूबरू होते हैं..
.
आदरणीया 'निर्मला कपिला' द्वारा सुंदर गज़ल..


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हसरतें दम तोड़ती हैं मुफलिसी के सामने


ये तिरी शान ए करम है ऐ मिरे परवरदिगार"
अब भी हूँ साबित क़दम मुश्किल घड़ी के सामने।


आदरणीया 'रिंकी' द्वारा  रचित 'उमुक्त' ब्लॉग से संवेदनशील विषय..




हमारे देश में कोई कुछ बने या न बने दूल्हा दुल्हन जरूर बनता हैलगता है शादी 
बहुत जरुरी है चाहे परिस्थिति किसी भी तरह की हो शादी से बढ़कर कुछ नहीं, गत दिनों मे कुछ घटनाएँ ऐसी घटी की मैं सोचने पर मजबूर हो गई की क्या उन लडकियों की शादी बहुत जरुरी थी उस समय”?

ब्लॉग 'तीर ए नज़र' की तीखी नज़र हास्य व्यंग्य रचना..



इधर-उधर खाली जगहों पर इतने लोग खड़े थे कि तिल रखने की
 भी जगह नहीं थी । मंच जो विशेष चोरों के लिए बना था, वह भी
 आंशिक रूप से अतिक्रमण का शिकार हो चुका था । यह 
सभी के लिए आश्चर्य का नहीं, बल्कि
 संतोष व गौरव का विषय..


आदरणीया 'शशी पुरवार' द्वारा रचित 'क्रोध बनाम सौंदर्य'..



आज महिला और पुरुष समान रूप से जागरूक है. यही एक
 बात है जिसपर मतभेद नहीं होते है।  कोई आरक्षण नहीं है
कोई द्वन्द नहीं है, हर कोई  अपनी काया को सोने का पानी चढाने
 में लगा हुआ है। ऐसे में साहब कैसे पीछे रह सकते हैं.  हर कोई 
सपने में खुद को  ऐश्वर्या राय और अमिताभ बच्चन के रूप में देखता है।
   साहब इस दौड़ में प्रथम आने के लिए बेक़रार है। बालों  में  बनावटी
 यौवन टपक रहा हैं,

किन्तु बेचारे पेट का क्या करे ? ऐसा लगता है जैसे

 शर्ट फाड़कर बाहर निकलने को तैयार बैठा हो. कुश्ती जोरदार है।
 चेहरेकी लकीरें घिस


आदरणीय 'डॉ जय प्रकाश तिवारी' द्वारा  रचित 'प्रज्ञान विज्ञान' से..



सत्कर्म बिना सभी व्यर्थ।

सत से विलग होते ही यहाँ  
कर्म वही, बन जाता कुकर्म

अन्वीक्षा कर,
बौद्धिक दृष्टि  का रुख जरूर प्रकट करें
संवादों  और  सुझाओं की अपेक्षा।
 'आओ प्रज्जवलित विचारों से रौशन करें '
।। इति शम।।
धन्यवाद।
पम्मी     



15 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात....
    सुंदर व पठनीय रचनाओं का चयन
    रिंकी राउत के ब्लॉग की रचना पहली बार
    यहाँ आई है..
    आभार
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. शुभ प्रभात !

    आज पम्मी जी ने विविध रंगों से परिपूर्ण रचनाओं का संकलन पेश किया है।
    सभी लिंक्स अपनी विशेषता के साथ।
    सभी चयनित रचनाकारों को बधाई।
    सादर आभार।

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत ही सुन्दर लिंक संयोजन..।।

    जवाब देंहटाएं
  4. सुप्रभात, सुंदर सूत्रों का संकलन ! बधाई !

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर लिंकों का संयोजन , सुंदर प्रस्तुति पम्मी जी।

    जवाब देंहटाएं
  6. हमेशा की तरह लाजवाब लिंक संयोजन ! बहुत सुंदर आदरणीया ।

    जवाब देंहटाएं
  7. वाह आनन्द आ गया । बधाई पम्मी जी को इस उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिये।

    जवाब देंहटाएं
  8. जी, धन्यवाद ..
    आज के इस अंक में आप सभी की उपस्थिति एवम् विचारों के लिए।

    जवाब देंहटाएं
  9. सुन्दर प्रस्तुति व अनूठे लिंको से अलंकृत आज का अंक
    आदरणीय पम्मी जी ,शुभकामनायें
    आभार ,"एकलव्य"

    जवाब देंहटाएं
  10. अलग अलग रंग छटाओं को लिए खूबसूरत हलचल प्रस्तुति! बधाई !

    जवाब देंहटाएं

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