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शनिवार, 7 जनवरी 2017

540 .... गीत




सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष


क्या कोई सही सही बता सकता है

प्रेम की वज़ह







सुबो से शब तक की

कहानी







सब कहते, बोलते नहीं


सच







जीत जाओगे गर गुनगुना सको


गीत








भावना मिश्रा की

कविता








फिर मिलेंगे ..... तब तक के लिए

आखरी सलाम

विभा रानी श्रीवास्तव








2 टिप्‍पणियां:

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