---

शुक्रवार, 4 मार्च 2016

231...“घुटन क्या चीज़ है, ये पूछिये उस बच्चे से,

जय मां हाटेशवरी...

आनंद के इस सफर में...
मैं कुलदीप ठाकुर...
पुनः उपस्थित हूं....
“घुटन क्या चीज़ है, ये पूछिये उस बच्चे से,
जो काम करता है, खिलौने की दुकान पर….!!!

सबसे पहले....
s1600/images%2B%25281%2529
प्राणनाथ ! यह बात जान लें, जो-जो दोष बताये वन के
गुण रूप वे हो जायेंगे, स्नेह आपका पाकर सारे
रघुनन्दन ! मृग, सिंह आदि, वन प्राणी भाग जायेंगे
देख आपका रूप अनोखा, होकर फिर भयभीत आपसे
निश्चय ही मुझे जाना वन, गुरूजनों की ले आज्ञा
प्राण शेष ये नहीं रहेंगे, हुआ यदि वियोग आपका
देवराज भी साथ आपके, नहीं अनादर कर सकते हैं
पतिव्रता सह सके वियोग न, यही आप भी कहते हैं
यद्यपि वन में दोष व दुःख हैं, किन्तु यह नियति है मेरी
पिता के घर यह बात सुन चुकी, सत्य विधि यह होके रहेगी

मम्मी नहीं जाना स्कूल--महेश कुशवंश
s1600/sardee
 टीचर जी  बस डांट पिलातीं
सर जी छूते इधर उधर
वाशरूम भी साफ नहीं है
जाऊ तो मैं जाऊ किधर
आया दिनभर मुह बिचकाती
भैया गाते गाना
बच्चे चोटी खीच डालते
चट कर जाते खाना
मैं तो घर मे ही पढ़ लूँगी
तुम ही मुझे पढ़ाओ
गंदे संदे स्कूलों से
छुट्टी मुझे दिलाओ
सिर्फ गाल बजाएँगे
s1600/neta
देश द्रोह की परिभाषाएँ बदल गई
बोलने की आज़ादी
मूलभूत अधिकार ही  रह गए याद
देश खो गया
सत्ता की कुर्सी रह गई आँखों के सामने
देश कहाँ  गया
भाई इन्हें सत्ता मे रहने दो
नही तो वो दिन दूर नहीं जब ये
सब कुछ भूल जाएंगे
वोटों के लिए ईमान ही नहीं बेचेंगे
माँ भी पड़ोसियों को दे आएंगे


देश के बैरियों का करूँगा कतल |--उमाशंकर मिश्रा
    उनकी महफ़िल में कैसी तकरीर थी
कट गई गरदने लापता कौन है?
                    दंगे भड़के नहीं यूँ लगाये गए|
तल्ख़ किसने कहे सरफिरा कौन है?


सोच की हद--सु-मन (Suman Kapoor)
s320/stock-photo-60649746-hand-holding-on-chain-link-fence
चल दूँ राह पर उस तरफ
जिस तरफ ले जाना चाहे कोई
दिल दिमाग के हर दरवाजे पर
लगा दूँ एक जंग लगा ताला
मन के वांछित कारावास से
कर दूँ निर्वासित अपना वजूद


ग़ज़ल--Naveen Mani Tripathi
हो   रही   डुग्गी   मुनादी   इश्क  की ।
तूम  उसे   बस   मेहरबाँ  कहते  रहो ।।
मत लगा  तू  तोहमतें  नाजुक  है  वो ।
राह   पर   बन   बेजुबाँ   चलते  रहो ।।


गए दि‍न की तस्‍वीर.....--रश्मि शर्मा
s400/DSC_0022%2Bcopy
स्‍लाइड शो की तरह
गुजरती है आंखों से
गए दि‍न की तस्‍वीर सारी
झील का पानी अब तक ठहरा है....


मुसाफ़िर--नीलांश
 मुझे मालूम है फिर आसमाँ का  रंग क्या होगा
 परिंदा  हूँ,भरोषा पँख पर खुद के, अगर कर लूँ
कल, सूरज  !, न  जाने कौन सी ,धूप लाये "नील"
मुसाफ़िर हूँ ,हर रास्ते  को हमसफ़र कर कर लूँ


काम करो ऐसा कि पहचान बन जाये;
हर कदम चलो ऐसे कि निशान बन जायें;
यह जिंदगी तो सब काट लेते हैं;
जिंदगी ऐसे जियो कि मिसाल बन जाये!
धन्यवाद।













                        






5 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात
    दुखती रग
    “घुटन क्या चीज़ है, ये पूछिये उस बच्चे से,
    जो काम करता है, खिलौने की दुकान पर….!!!
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. पठनीय और खूबसूरत लिंक्स..आभार !

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी पसंद की दाद देना होगी |

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत बढ़िया हलचल प्रस्तुति
    आभार!

    जवाब देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।