---

▼

शनिवार, 24 अक्टूबर 2026

4904...जब भी मिला, बिखरे हुए हालात में मिला...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीया मीना शर्मा जी की रचना से।

सादर अभिवादन।

शनिवारीय अंक में पढ़िए पाँच रचनाएँ-

ऐसे ही दाग चेहरे के स्वीकार कीजिए…

छोटी सही मगर वो सकारात्मक तो हो,
फिर मिल के इस विचार का विस्तार कीजिए.

क्यों बीच राह आपने रोका है नाव को,
इस पार कीजिए या तो उस-पार कीजिए.

*****

कितने भरम मिटा गया...

मिलकर भी तू कहाँ मिला,

पूरा किसी जनम !

जब भी मिला, बिखरे हुए

हालात में मिला!

*****

स्वर्ग 

स्वर्ग से पृथ्वी

स्वर्ग से बेहतर दिखती थी

मगर पृथ्वी से स्वर्ग

कैसा भी नहीं दिखता था

*****

राम का सत्य 

राम की सरलता और सादगी के समक्ष
रावण अपनी विराट अनैतिकता के साथ
कद में बड़ा होने लगा है!
​और हम...
सत्य को सिकुड़ते और
अहंकार को छलाँग लगाते देखते हुए,
मूकदर्शक बनने को मजबूर हैं।

*****

बस! अब और नहीं

“आपका टेलर कौन सा है नलिनी।  फिटिंग बहुत बढ़िया होती है आपके कपड़ों की।”

सारे शरीर पर रेंगती बॉस की ललचाई नज़रें उसे कचोट रही थीं। रोज़ रोज़ की इस बदनीयती को कब तक नज़रअंदाज़ करती रहे वह!नलिनी ने कठोर दृष्टि से बॉस को घूरा! कुछ सकपका कर बॉस ने जोड़ा, “वो मेरी बेटी दीपा कह रही थी एक दिन! किसी दिन उसे भी ले जाइयेगा अपने साथ अपने टेलर के पास!”

*****

प्रणाम करें और सिखाएं भी

इसीलिए यदि हर घर का नियम बन जाए कि छोटे सदस्य सुबह उठते ही सबसे पहले अपने बड़ों का आशीर्वाद लेंगे, तो विगत रात घर पर चाहे जैसा भी भारी माहौल रहा हो, किसी कारण कटुता फैल गयी हो, कुछ मनमुटाव ही क्यों ना हो गया हो, यदि दूसरी सुबह बच्चे, बड़ों का चरण स्पर्श करते हैं तो ऐसा कोई भी बुजुर्ग सदस्य नहीं होगा जो सब कुछ भूल निर्मल मन से उन्हें आशीर्वाद ना दे ! बड़े-बुजुर्ग कभी भी अपने बच्चों का अहित नहीं चाहते ! बस इतने से ही सारी कटुता तिरोहित हो जाएगी और सब कुछ ''नार्मल'' भी हो जाएगा। अब सिर्फ जरुरत है अपनी परंपराओं, अपनी संस्कृति, अपने प्रथाओं के पुनर्जागरण की !

*****

फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव    


4 टिप्‍पणियां:

  1. स्वर्ग और बस और नहीं के लिंक नहीं लगे हैं |

    जवाब देंहटाएं
  2. तकनीकी गड़बड़ी को दुरुस्त कर लिया गया है। सादर आभार सर ,सादर प्रणाम।

    जवाब देंहटाएं
  3. सुप्रभात!! सराहनीय रचनाओं की खबर देता अंक, साधुवाद!

    जवाब देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।