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बुधवार, 21 अक्टूबर 2026

4901..सबने हाँ में हाँ मिलाई..

 ।।भोर वंदन।।

"जानकी जीवन, विजयदशमी तुम्हारी आज है,

दीख पड़ता देश में कुछ दूसरा ही साज है।

राघवेंद्र! हमें तुम्हारा आज भी कुछ ज्ञान है,

क्या तुम्हें भी अब कभी आता हमारा ध्यान है?"

 मैथिलीशरण गुप्त

त्योहारों बीच कुछ पल रचनात्मक रूप से..आनन्द लिजिए लिंक पर क्लिक कर..✍️

विजयादशमी को दशहरा क्यों कहते हैं


रावण अत्याचारी था! वह लंका के सारे संसाधन अपने मित्र राक्षसों पर लुटा रहा था।उसे विरोध प्रदर्शन बर्दाश्त नहीं थे। उसने नीति की बात कहने को भी विरोध माना और अपने भाई विभीषण को लात मारकर निकाल दिया। ..

✨️

गिरें खंडहर हर विकार के

एक दशहरा ऐसा भी हो

जल जाए हर कलुष हृदय से,

अहंकार का मुकुट गिरे फिर

भूमि पर श्री राम के शर से !

✨️

मेढक बोला टर्र टर्र टर्र

बारिश का मौसम है सर

बोर हो गया हूँ पढ़-पढ़कर

जल्दी से अब छुट्टी कर

झींगुर ने भी दौड़ लगाई

सबने हाँ में हाँ मिलाई

चलो भाइयों मौज मनाएँ

हम सब बारिश में नहाएँ..

✨️

मुद्दत से नींद आई नहीं

बहारें भी आ आकर लौट गयीं 

तेरा इंतज़ार करते करते 

खोया चॉंद से चेहरे का नूर  

तेरा इंतज़ार करते करते ।..

✨️

।।इति शम।।

धन्यवाद 

पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️



4 टिप्‍पणियां:

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