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शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

4890 ..दिल की बातें कह दें, ऐसे लोग कहाँ मिलते हैं .....

 सादर अभिवादन




एक नटखट किरण बच्चे-सी
खड़ी जंगला पकड़ कर,
किलकती है, "मुझे देखो !"
 
साँस रोके ---
बाँह फैलाए खड़ा गुलमुहर ...
कब वह कूद कर आ जाए उसकी गोद में !
-कुंवर नारायण सिंह

देखिए रचनाएं....























 श्वेता और दिग्विजय के सोच में फर्क
किसी नैन सुख को आसानी से नज़र आजाएगा



सादर समर्पित
वंदन


2 टिप्‍पणियां:

  1. दिग्विजय जी, कुँवरनारायण की छोटी सी सुंदर किरण की कार्निस को आज पाँच लिंकों में जगह देने के लिए धन्यवाद

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  2. महालया के पावन पर्व पर शुभकामनाएँ ! सुंदर प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं

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