---

▼

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

4886...चीख़ का कारोबार....

 मंगलवारीय अंक में

आप सभी का स्नेहिल अभिवादन।
------------

जब-जब एशियन गेम्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा ऊपर उठता है और राष्ट्रगान बजता है, तो वह केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं होती, बल्कि देश की करोड़ों उन

नन्हें-नन्हें सपनों की जीत होती है

जो अपने पैरों पर खड़े होने और कुछ बड़ा करने का निश्चय करती हैं।

​एशियन गेम्स के मंच पर भारतीय महिला एथलीटों ने जिस निडरता और प्रतिबद्धता के साथ अपने हुनर का प्रदर्शन किया है, उसने देश के खेल इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है। शूटिंग और एथलेटिक्स से लेकर बॉक्सिंग, हॉकी और तीरंदाजी तक—हर स्पर्धा में बेटियों ने न केवल पदक जीते, बल्कि यह संदेश भी दिया कि भारत की खेल क्रांति का नेतृत्व अब वे खुद कर रही हैं।

​इन बेटियों का यह ऐतिहासिक प्रदर्शन आने वाली पीढ़ी के लिए एक मजबूत नींव की तरह है।

शाबाश, लड़कियों हमें गर्व है तुम पर।


आज की रचनाऍं- 

आज के लिए इतना ही
मिलते हैं अगले अंक में
सादर।

4 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर चयन
    स्तरीय रचनाएं
    आभार
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. शानदार अंक
    एशियन गेम्स की उपलब्धियां प्रेरक हैं

    जवाब देंहटाएं
  3. श्वेता जी, आप की सराहना और कुँवर नारायण की कविताओं को यहाँ जगह देने के लिए धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  4. हमारे ब्लॉग की पोस्ट शामिल करने के लिए बहुत शुक्रिया।

    जवाब देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।