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शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026

4882....बापू आ ही जाना याद

 शुक्रवारीय अंक में

आपसभी का स्नेहिल अभिवादन।

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 आज राष्ट्रपिता की
157वीं जयंती है।
कोई व्यक्ति महान पैदा नहीं होता है
उसके विचार और कर्म की शुद्धता
ही उसे आम लोगों से अलग देखने पर मजबूर करती है।
करोड़ों भारतवासियों के जीवन में बदलाव
लाने का आजीवन प्रयास करने वाले
बापू को सादर प्रणाम।
उनके द्वारा बतलाया गया
सत्य और अहिंसा का मार्ग समाज में शांति और सद्भावना का संदेश है ऐसा विश्व भी मानता है।

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हमारे पूर्व प्रधानमंत्री 
शास्त्री जी की 122 वीं जयंती
का उत्सव देश मना रहा।
सरलता,सादगी,विनम्रता,कर्मठता और जनकल्याणकारी भावना उनके उत्कृष्ट व्यक्तित्व को विशेष बनाता है।
हमारे राष्ट्र नायक को सादर प्रणाम।
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आपकी की रचनाऍं 
आज हमारे प्रिय और आदरणीय 
सुशील सर का जन्मदिन भी है।
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी उनकी क़लम से-













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आज के लिए इतना ही
मिलते हैं अगले अंक में।
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7 टिप्‍पणियां:

  1. आत्मीय आभार आपका
    राष्ट्रनायकों को नमन

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर सूत्रों को समाहित किये अति उत्तम संकलन । राष्ट्रनायकों को नमन ।आज के अंक में सम्मिलित करने के लिए आपका हार्दिक आभार श्वेता जी !

    जवाब देंहटाएं
  3. सुंदर अंक !सुशील सर को जन्मदिन की हार्दिक शुभेच्छा 💐💐💐💐

    जवाब देंहटाएं
  4. 'मालगाड़ी' की गति से 'मौन' रहते हुए 'जड़ों की सॉंसें' गिनते हुए 'बापू आ ही जाना याद' के उपरांत 'Gen-0 का प्रतिरोध' सुपाठ्य हैं.
    साधुवाद

    जवाब देंहटाएं

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