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शुक्रवार, 28 अगस्त 2026

4848....धागे कच्चे है मगर

शुक्रवारवारीय अंक में
आप सभी का 
स्नेहिल अभिवादन।


आज रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जा रहा।

कहते हैं, कच्चे सूत के धागों में जो ताकत होती है, वो दुनिया की बड़ी से बड़ी फौलादी जंजीरों में भी नहीं होती।  रक्षाबंधन सिर्फ एक पर्व नहीं है; यह तो भाई की आँखों में बहन के लिए छिपी फिक्र है, और बहन की दुआओं में भाई की तरक्की का अटूट विश्वास है। 


आज का दौर बदलाव का दौर है। हमारी जीवनशैली, हमारी प्राथमिकताएं और यहाँ तक कि हमारे त्योहार मनाने के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं। ऐसे में जब 'रक्षा बंधन' का पावन पर्व हमारे सामने आता है, तो यह केवल एक पारंपरिक रीत मात्र नहीं रह जाता, बल्कि समकालीन समाज की प्राथमिकताओं को टटोलने का एक आईना बन जाता है।

इतिहास गवाह है कि रक्षा बंधन का उद्गम सुरक्षा के एक मूक आश्वासन से हुआ था। एक ऐसा दौर जहाँ कलाई पर बंधा सूत का धागा जीवन भर की रक्षा का दायित्व सौंप देता था। लेकिन आज, जब देश की बेटियाँ अंतरिक्ष से लेकर कॉरपोरेट जगत तक और खेल के मैदानों से लेकर सीमाओं तक अपनी योग्यता का परचम लहरा रही हैं, तब 'सुरक्षा' के इस पारंपरिक नजरिए को नए सिरे से परिभाषित करने की आवश्यकता है। आज की बहन सिर्फ रक्षा की याचक नहीं है, वह खुद में इतनी सशक्त है कि संकट के समय अपने भाई की ढाल बन सके। आज का रक्षा बंधन भाई-बहन के बीच 'निर्भरता' का नहीं, बल्कि 'सह-अस्तित्व और समानता' का उत्सव है।



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आज की रचनाऍं--


















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आजकल राखी पर आधारित
गाने बनने बंद ही हो गये है लगता है।
सुनिये एक गीत


मेरे भैय्या मेरे चंदा

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आज के लिए इतना ही
मिलते हैं अगले अंक में।
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7 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर रचनाएं का संकलन
    राखी कह या श्रावणी, पावन यह त्यौहार
    कच्चे धागों से बंधा ,भाई बहन का प्यार।।

    थाली लेकर शगुन की,बहन सजाये भोर।
    रोली से टीका किया, बाँधी रेशम डोर।।
    आभार
    वंदन

    जवाब देंहटाएं
  2. मेरे भैय्या मेरे चंदा
    मेरे अनमोल रतन
    तेरे बदले मैं
    जमाने की कोई चीज न लूँ
    जय हो

    जवाब देंहटाएं
  3. रक्षाबंधन की मंगलकामनाएं | आभार श्वेता |

    जवाब देंहटाएं
  4. सुप्रभात! सभी रचनाकारों को रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ, सार्थक भूमिका और पठनीय रचनाओं से सजा सुंदर अंक, आभार श्वेता जी!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. माँ, इस बार मैं किसे राखी बाधूँगी ? नन्ही आशा ने प्रश्न भरी नज़रों से जब उसकी तरफ़ देखा तो सीमा के दिल में एक हूक सी उठी। उसका कोई भाई नहीं था, इसकी याद वह हर वर्ष राखी पर दिला देती थी।
      इसका लिंक नही है
      कृपया दें

      हटाएं

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