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सोमवार, 17 अगस्त 2026

4837.. किसी भी लड़की को तेरे नाम से पुकारने पर भी वह 'तू' नहीं हो जाती है

 सादर अभिवादन 


80 वां स्वतंत्रता दिवस पर अशेष शुभकामनाएं
रविवार को सम्पन्न हुआ राष्ट्रीय उत्सव, 
सारी आशंकाए निराधार रही।

सारे कार्य सिलसिले वार निर्विघ्न  सम्पन्न
सबने राहत की सांस ली..पत्रकार और न्यूज़ एंकरो की आदत है
चिल्लाने और हड़बड़ाने की निर्विघ्न हुआ तो क्यों हुआ ,
कहीं गड़बड़ी क्यों नहीं हुइ। 
होना थी गड़बड़ी ? हमारी रोजी-रोटी का प्रश्न है
क्यों ? हमारे पेट मे लात मार रहे हो। 

प्रधान मंत्री ने पेट्रोल - डीजल पर टैक्स शून्य कर दिया...
अच्छा काम दे दिया पीएम साहब ने
स्वतंत्रता दिवस की सौगात
पसंदीदा रचनाएं

लगभग चार वर्ष बाद आज हमारे प्रिय रचनाकार रोहिताश्व घोड़ेला
की दो रचनाएं दिखी, दोनों रचनाएं आज है


दूरियों में जो रेगिस्तान हो आया है 
इन्हीं तपती दूरियों में से भी  
तुम कहीं से भी निकल सकती हो,
तुम तपती रेत की लपटों के साथ या 
बरसती आँच के साथ बरसो, 
लू के साथ बहती हुई बहो.




एक बार संसद में
एक कुत्ता घुस गया।

सभी सांसद
घबराकर अपनी-अपनी सीटों के पीछे छिपने लगे।

तभी एक अनुभवी सांसद ने कहा—

“घबराइए नहीं,
ये बेवजह नहीं काटता।”





उजाले
और
अंधेरे के मध्य खोजता रहा पसंद 
अपनी, हालांकि चाहतें जीती
रहीं किसी और के मातहत,
समझ पाना था कठिन





घर का सजाना कोई आसान काम नहीं
खाना पकाना कोई आसान काम नहीं

फ़ोन में एप्प हो तो सब कुछ आसान है
प्रॉम्प्ट सही हो तो सब कुछ आसान है




तुमसे ये कहना है-
मेरे यहाँ  किसी भी लड़की को 
तेरे नाम से पुकारने पर भी 
वह 'तू' नहीं हो जाती है 
जबकि तेरे वहाँ की लड़की 
हर जगह की लड़की होती है. 
ठीक ऐसे ही तेरे वहाँ कोई लड़का 
मैं नहीं बन पाया होगा।

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लघुकथा-कविता का तीसरा पाक्षिक अंक
अगला अंकः 30 अगस्त 26 को
 रचना प्रेषण तिथिः 28 अगस्त 26
विषयः रतजगा, जगराता, व्रत
कृपया नोट करें
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सादर समर्पित
वंदन

4 टिप्‍पणियां:

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