भोर वंदन
"आज जो अच्छे हैं, उनमें बहुत थोड़े सच्चे अच्छे हैं। जो बुरे हैं, उनमें बहुत थोड़े सच्चे बुरे हैं। अच्छे लोग ज़्यादा हैं और बुरे कम हैं। अच्छे में सच्चे कम हैं और बुरे में सच्चे बहुत कम हैं। कुल मिलाकर सच्चे लोग बहुत कम हैं।"
विनोबा भावे
वर्तमान परिवेश पर नजर डाल कर उपर्युक्त पंक्तियॉ पर नजर पडी,आप सब भी पढे और लिंकों को देखे..✍️
कुछ शब्द
बिना बोले
निःशब्द कर देते हैं।
कुछ शब्द
बहुत बोलते हैं,
पर उन्हें
सुनता कोई नहीं।
वाक्यों के अर्थ..
✨️
चुप्पी के भी अर्थ बड़े हैं
यूँ ही ताले नहीं जड़े हैं ।
संविधान को घोट रखा है
लोकतंत्र की राह अड़े
✨️
बिन छाँव की सड़क
मैं सड़क हूँ,
कभी मेरे संग चलते थे पेड़ों के साये,
पंछियों के गीत,
और राहगीरों की मुस्कान।
आज धूप मेरे सीने पर
अंगार बनकर उतरती है।
✨️
ऐ कविता शब्दों की तह में
मेरे सारे दर्द छुपा लेना ,
जब अंतस् का भाव जगे
और हृदय आकुल हो जाये
भींच अंक में सकल वेदना
पंख पे कलम बिठा लेना
ऐ कविता शब्दों की तह में
मेरे सारे दर्द छुपा..
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️
कुछ शब्द
जवाब देंहटाएंबिना बोले
निःशब्द कर देते हैं।
बेहतरीन अंक
आभार
वंदन
सच्चे लोग बहुत कम हैं
जवाब देंहटाएंसार्थक बात
शानदार