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मंगलवार, 5 मई 2026

4733 ...मेरा गाँव अब गाँव कम, खंडहर अधिक नज़र आने लगा है

 सादर अभिवादन



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यूनियन सरकार से मांग करेगी कि ई सी आई की क्लोजर की परमिशन वाले आवेदन को तुरंत निरस्त किया जाए. यदि फैक्ट्री के मालिक क्लोजर चाहते हैं तो यूनियन के साथ समझौते के माध्यम से ही संभव हो सकता है, अन्यथा नहीं. लेबर कमिश्नर खुद मजदूरों के बीच जाकर उनके 'ट्रक सिस्टम' के 
दावों की जांच करें और रिपोर्ट सरकार को दें.
 यदि 8 मई तक ठोस जवाब नहीं मिलता, तो 11 मई को श्रम मंत्री के निवास पर प्रदर्शन और घेराव होगा.

कुलकर्णी जी ने कहा कि, “मैं व्यक्तिगत रूप से प्रयास करूंगा कि
श्रम मंत्री 6 या 7 मई को मिलने का समय दें.”

मीटिंग खत्म हुई, तो रात के साढ़े आठ बज रहे थे. कुलकर्णी जी ने प्रिया के कंधे पर हाथ रखा. "प्रिया, तुमने आज हमारी लड़ाई का रूप बदल दिया है, जो अधिक मानवीय है. लेकिन याद रखना, जो रास्ता हमने अब चुना है वह कांटों भरा है. मैनेजमेंट और लॉ डिपार्टमेंट अब और भी शातिराना चालें चलेंगे."

प्रिया ने अपनी डायरी बैग में रखी. "सर, 6 दिन बचे हैं. 11 मई तक हमें कुछ न कुछ हासिल करना होगा.




जब फसल लहलहाई,
तो पहरे पर खड़े कर दिए गए
असंख्य प्रवक्ता—
अंधेरे के फायदे गिनाने के लिए।
उसकी फैलती विकरालता देख
उजाले भी सहम गए,
सामने आने से कतराने लगे।
मौका देखकर
उजाले को “अफवाह” करार दिया गया,
और हर दीये की लौ पर
ठोंक दी गई मुहर—
“एक्सपायरी डेट”  की।




मुर्दा दिलों में उमंग है बिहू में,
बेरंग चेहरों पर रंग है बिहू में।

ढोल जो बजा ,तो थिरकने लगे पाँव,
शराब में नहीं, जो नशा है बिहू में।

भटकते रहोगे जंगलों में कब तक,
लौट आओ बस्ती में इस साल बिहू में।




चिलचिलाती धूप में 
घंटों श्रम करता 
काट कर चट्टानों को 
सुरंगें बिछाता
श्रमिक रखता नींव 
आलीशान अट्टालिकाओं की 
श्रावक घंटों ध्यान साधना कर 
अपने भीतर जाता 
प्रेम और करुणा के 
स्रोत छिपे हैं जहाँ 



धक-धक, धीरे-धीरे, साथ-साथ, कुछ-कुछ
लखि-लखि, तीरे-तीरे, सांस-सांस, सचमुच

आप कई आवरण के प्रकरण परे हैं विद्यमान
थाप जिंदगी के कई आवरण धरे हैं निदान
मति-मति, दौड़े-दौड़े, आस-आस, हँसमुख
लखि-लखि, तीरे-तीरे, सांस-सांस सचमुच





सांसों की माला
धड़कन की सरगम 
टूट गई तो चल दिए
कहाँ गए, कौन गया
वेद-पुराण न कुछ कह सके





मेरा गाँव अब गाँव कम,
खंडहर अधिक नज़र आने लगा है;
हर दूसरे घर ने नींव को नंगा कर दिया है।
खिड़कियाँ अंदर से बंद हैं,
पर समय ने उन्हें बाहर से खोल दिया है;
दरवाज़े पर ताला किसी
बूढ़े के हाथ में लाठी की तरह पड़ा है।




सादर समर्पित
सादर वंदन

8 टिप्‍पणियां:

  1. आज सात अंकों की प्रस्तुति
    कल पम्मी जी आएंगी
    वंदन

    जवाब देंहटाएं
  2. आज सात लिंकों की प्रस्तुति
    कल पम्मी जी आएंगी
    वंदन

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  4. शुक्रिया
    सुन्दर समायोजन 😃

    जवाब देंहटाएं
  5. सुंदर प्रस्तुति, आभार दिग्विजय जी!

    जवाब देंहटाएं

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