दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
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मंगलवार, 14 अप्रैल 2026
4712...प्रेम में व्याकुल हुआ मन
सोमवार, 13 अप्रैल 2026
4711...झूमर से झूमते अमलतास फूले...
शीर्षक पंक्ति: आदरणीय नूपुरं जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
विनम्र श्रद्धांजलि!
अपने स्वर से दुनिया को विविधतापूर्ण मनोरंजन देनेवाली आशा जी अपने पीछे संगीत का समृद्ध ख़ज़ाना छोड़ गयीं. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे.
उनके कुछ नग़्मे जो मेरे दिल को छू गये-
सोमवारीय अंक में पढ़िए पाँच पसंदीदा रचनाएँ-
झूमर से झूमते अमलतास फूले
रास्तों के किनारे सोनमोहर बिछे
छज्जे-छज्जे पर बोगनवेलिया लगे
मजाल है कि कोई भी रंग छूट जाए
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धीरे-धीरे कुछ आँखों को इसमें भी कला नज़र आई,बेतरतीब सी ये आदत, एक अजीब सी पहचान बन पाई।जो था कभी आलस का खेल, अब बन गया एक तमाशा,
लोग यहाँ तस्वीरें खींचें, जैसे कोई अनोखा नज़ारा।
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कितनी चट्टानें थीं भारी
रस्तों में पावन सलिला के,
राह बनाती उन्हें तोड़ती
ठुक-ठुक चलती थी अंतर में!
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यूनियन अध्यक्ष ने माइक संभाला, सभा शुरू हुई. आज उनका लहजा बदला हुआ था, आवाज में गुस्सा था और ऊँची थी, "साथियों, प्रबंधन कहता है कि कारखाना घाटे में है! जिसके कारण वे इसे चलाने में असमर्थ हैं, वे सरकार से इसे बंद करने की परमिशन मांग रहे हैं. लेकिन आज हमारे पास वो सच है जो इनके मुहँ बन्द कर देगा."
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आज पढ़िए...'पंचवटी की छाया में है, सुन्दर पर्ण-कुटीर बना'
रविवार, 12 अप्रैल 2026
4710 ..ख़ुद अपनी हँसी से आँख मिलाना भूल गए हम।
सादर अभिवादन
AIIMS के लिए पूरा श्रेय मिलना चाहिए, इसमें कोई दो राय नहीं।)
तुम्हारी हथेली
काश! कि ये दुनियारी हथेली
कोमल होती
तुम्हारी हथेली की तरह
मैं रख देती चुपके से
इच्छाओं के फूल
और गहरी साँसें
पतझड़ की टूटन
अब सँभलती नहीं
उदासियाँ दफ़न हो रही हैं
साँसों में
साँसें कितनी उथली चलती हैं
इन दिनों।
कच्चा चिट्ठा
अचानक प्रशांत बाबू बोल उठे. "कॉमरेडों, तुमने जबर्दस्त काम किया है. फैक्ट्री प्रबंधन के लिए डेथ वारंट तैयार कर दिया है.. हमने साबित कर दिया है कि फैक्ट्री मुनाफे में चल सकती है, बस मालिक की नीयत खोटी है."
उनके चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी. "शानदार! यह काम एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की टीम हफ़्तों में करती. अब हमारे पास आम सभा में मज़दूरों को देने के लिए केवल ही भाषण नहीं, बल्कि ठोस सुबूत हैं."
सादर समर्पित
सादर वंदन
शनिवार, 11 अप्रैल 2026
4709 ..हठ कर बैठ गया आमरण अनशन पर और मैं बन जाऊँगा धरती का भगवान।
सादर अभिवादन
शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026
4708... अपने कर्म ही
हर माह का अपना सौंदर्य, गंध, स्पर्श, शब्द संगीत और रस होता है। फागुन रंग का, चैत गंध का, बैसाख रस का महीना है। फागुन बीतते ही चैत के शब्द अलग हो जाते, हवाओं में अलग महक और गीत भर जाते हैं। बैसाख आते आते मौसम की छाप बदल जाती है। गुलमोहर और अमलताश के साथ नीम के फूलों से, जामुन के नए पत्तों से, अमिया की खुशबू से बैसाख का सौंदर्य निखर आता है।
बैसाखी हवाओं के स्पर्श को महसूस करिए, रसभीनी, थोड़ी अलसाई और तरुण भाव के साथ बह रही बैसाखी हवाओं को त्वचा पर से गुजरते महसूस कीजिए। बैशाखी हवाओं में घुली कोयल की कटीली तान भोर की छुअन को नशीली बना देती है। सांझ को चाँदनी की छाँह में बेली की कली से फूटती गंध मन को आनंद से ओतप्रोत कर देती है।
घड़े का ठंडा पानी , गुड़ का शरबत,अमझोरा, शिकंजी और सत्तू का स्वाद बैसाख का स्वाद है। चूल्हे पर सिंकती नए गेंहू की रोटी की गंध बैसाख की गंध है। फूलों के दिन बीत गए, बैसाख फलों के रसगंध से भरता है। महुए का रस, आम का रस, बेल का रस ही तो बैसाख का रस है।
अपने कर्म ही
पहचान बनाते हैं ।
अपने कर्म ही
धूल चटाते हैं ।
बाकी सारी बातें
सब बेकार हैं ।
अपने कर्म ही
बनाते-बिगाङते हैं ।
बोध आत्मा का करें किस विधि
कहाँ उस आनंद को पाएँ,
उपजी है जिस स्रोत से सृष्टि
कैसे लौट वहाँ घर जायें !
आँखों में यौवन की चपलता पर
किनारों पर मंडरा रही थी
भूख की चिलचिलाती धूप
हँसती थी बेफिक्र सी हँसी
नहीं, उमड़ते गड्डे उसकी गालों में
पेट छिप जाता पीठ के अंदर
इस मनोरम विधि से अगले दिन दोपहर तक साल भर पहले हुये कत्ल के बारे में आधा गाँव जान गया,
गाँव का सरकारी चौकीदार जान गया और जान गया निकटस्थ थाना।
शाम होते न होते कातिल किसान के हाथों में लोहे के कंगन पड़ गये।
गुरुवार, 9 अप्रैल 2026
4707 ..अहं ब्रह्मास्मी, अहं कृष्णास्मी,अहं त्वमस्मी
सादर अभिवादन























