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गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

4728 स्त्री को प्रसन्न रख पाना एक मिथ्या है,

 सादर अभिवादन

स्त्री को प्रसन्न रख पाना
एक मिथ्या है,


जब तक सीता मैया
प्रभु राम के पास थीं उन्हें
सोने का हिरण चाहिए था,
जब पूरी सोने की लंका चरणों में थी
तो प्रभु राम चाहिए थे..!!

हे नादान पुरुष,
जो काम प्रभु ना कर सके,
वो तू करना चाहता है...?

नूतन रचनाएँ





"सर, क्या डॉ. जबसन ने वास्तव में आपके ऑपरेशन को स्वीकार किया हैं?
मरीज़ ने कहा "हाँ, मेरा ऑपरेशन वही कर रहे है।"
नर्स ने कहा "बड़ी अजीब बात है, विश्वास नहीं होता"
परेशान होते हुए मरीज़ ने पूछा ;
"लेकिन इसमें ऐसी क्या अजीब बात है?"





मैनेजमेंट ने अब उन 'कमजोर कड़ियों' को निशाना बनाना शुरू किया जो कर्ज में डूबे थे या घर की 
मजबूरियों से परेशान थे. प्रोडक्शन फ्लोर के एक कोने में, 
मैनेजर खन्ना ने तीन मजदूरों को किनारे ले जाकर फुसफुसाते हुए कहा. "देखो, तुम लोग पुराने और वफादार हो. मैं नहीं चाहता कि क्लोजर के बाद तुम सड़कों पर भटको. अगर तुम अपने साथ 10-15 मजदूरों की टोली तैयार कर लो, जो शांति से अपना हिसाब (Settlement) लेकर हटने को तैयार हों, 
तो मैं एमडी साहब से बात करके तुम्हें 'स्पेशल पैकेज' दिलाऊँगा. और हाँ, हर तैयार मजदूर के पीछे तुम्हें अलग से 'इनाम' भी मिलेगा."





जंगलों  में  अंचलों  में 
कुछ  हिरण  दल झूमते  
अब  कहीं  नवगीत  को  है 
मंत्रवत  वो  सुनते  
पेड़  पर्वत  खाइयों में 
दिख  रही  कोई  आत्मा




सतत संघर्ष में निहित मानवता का उत्कर्ष
जूझते जीवन से उन्हें क्या मौसम का विमर्श
मौसम प्रणय करता कभी चुहल बेशर्मी
सुना है गर्म गुम्बद है उफन रही गर्मी।





और वही भीतर का संसार
हर दिन
थोड़ा-थोड़ा परोसा जाता है
रोटी के साथ,
एक लंबी चुप्पी के साथ,
और उस मुस्कान के साथ
जिसमें अब कोई दावा नहीं,
कोई प्रतीक्षा नहीं
सिर्फ स्वीकृति की शांति है।

सादर समर्पित
सादर वंदन

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