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बुधवार, 29 अप्रैल 2026

4727..आज भी याद है..

 ।।प्रातःवंदन।।

चाहे कोई दार्शनिक बने साधु बने या मौलाना बने, अगर वो लोगों को अंधेरे का डर दिखाता है, तो ज़रूर वो अपनी कंपनी का टॉर्च बेचना चाहता है।

~ हरिशंकर परसाई

राजनीति  की भी यही रूप है एक तरफ चुनाव..और यहाँ बुधवारिय प्रस्तुतिकरण लिए हाजिर हूं..

ठहरा मन उपवन प्रशांत है 

छायी भीतर नीरव छाया 

 कब बिगाड़ पाती कुछ माया, 

ठहरा मन उपवन प्रशांत है 

छाया में विमल एकांत है !
✨️
- अप्रैल 27, 2026
चौंकिए मत और न ही यह तस्वीर देखकर नाक मुंह बनाइए… क्योंकि अब दूध,दही और पनीर से भी महंगा मिल रहा है गोबर.. जी हां, जिस गोबर को आप हम बिना गौमाता या गाय के मालिक की सहमति के मनचाही मात्रा में उठा लाते हैं,वह ऑनलाइन 299 रुपए किलो बिक रहा है। 
✨️



                                 बहुत दिनों से देखते चले आ रहे है कि प्राकृतिक आपदा हो या फिर मानव जनित - लोगों को कमाई के अवसर मिलने लगते हैं। भौतिक रूप से मिला तो लोगों ने संचयन करना शुरू कर दिया, ताकि आगे चलकर उसको ब्लैक में बेचकर धनवान बना जा सके। इस काम से आम आदमी के लिए संकट पैदा होने लगता है। यहाँ तक तो 
✨️


जो होती नदिया, मौन कहीं, बह जाती,
उन्मादित सी, क्यूँ बहती मैं?
अंकपाश मेरे, लिपटे पतझड़ के पात कई,
खोई उनसे, फूलों की बात कई!

कौन कहे, उनसे, बिखरे कितने आंगन,
उन्माद ही, ले उजड़े दामन,
उफनते सैलाबों में, जागे
✨️

मैं

तुम्हारी याददाश्त का कायल हूँ…

तुम्हें आज भी याद है—

बरसों पहले

किस फंक्शन में मैंने

कौन-सी शर्ट पहनी थी,
।।इति शम।।
धन्यवाद 
पम्मी सिंह ' तृप्‍ति '..✍️

3 टिप्‍पणियां:

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