सादर अभिवादन
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
---
सोमवार, 27 अप्रैल 2026
4725 ...नई मंजिलें राह देखतीं, रस्ते कुछ नव बुला रहे हैं
7 टिप्पणियां:
आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें
आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।
टिप्पणीकारों से निवेदन
1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।






शुभ प्रभात
जवाब देंहटाएंनई मंजिलें राह देखतीं
आइए आप भी
वंदन
सुप्रभात! सराहनीय रचनाओं की खबर देता अंक, आभार!
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छा लगा यह अंक । धन्यवाद।
जवाब देंहटाएंउत्कृष्ट लिंको से सजी लाजवाब प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंमेरी रचना साझा करने हेतु तहेदिल से आभार एवं धन्यवाद ।
मैं इस लिंक तक टिप्पणी के माध्यम से आसानी से नहीं पहुँच पाई ।दिग्विजय जी , ई मेल से आपकी प्रोफाइल तक जा कर फिर इस पाँच लिंकों वाले ब्लॉग तक पहुँच पाई हूँ । बहुत बहुत धन्यवाद शामिल करने के लिए
जवाब देंहटाएंसच कहु तो ये पूरा संग्रह पढ़कर अलग ही फील आता है। पहाड़ वाली पंक्तियाँ सादगी में भी रंग भर देती हैं, जैसे आँखों के सामने पूरा दृश्य खड़ा हो जाता है। फिर “नई मंजिलें” उम्मीद जगाती है और आगे बढ़ने का हौसला देती है। “धरती फूलों वाली” में हल्की सी कसक है, जो दिल को छू जाती है। बीच में कोर्ट वाला हिस्सा कहानी में रियल टच जोड़ता है, बिल्कुल ज़िंदगी जैसा। और आख़िर की शाम, वो तो सीधा दिल पर लगती है।
जवाब देंहटाएंसुन्दर चुनाव, बढ़िया रचनाएँ.
जवाब देंहटाएं