---

शनिवार, 14 मार्च 2026

4681 ...भाषा टकटकी बाँधे कुछ लिखने को कहती है ,,,

 सादर अभिवादन 

अगले शनिवार को शायद सिमई बनेगी
पता नही क्य़ूं
रचनाएं की ओर चलें...



कोरे कागज की निःशब्द 
भाषा टकटकी  
बाँधे कुछ लिखने को कहती है
सुख - दुख , आशा - निराशा
राग - विराग , तृष्णा और तोष




कट ही जाएगी, ये जिंदगी.... 
कुछ तुम्हारे साथ में, कुछ तुम्हारी याद में!

रेत में लिपटी, लंबी ठंड सी रात में,
इस धूप में, उन उम्मीदों की बरसात में,
अनबुझ से, जज्बात में,
तेरी चुप-चुप सी, हर बात में!




जीवन मिल सके सबको, इसलिए
तुम्हें जीते जी मरते देखा है।
तुमने ही तो दी है सबको,
आज जो परिवारों की रूपरेखा है।
कौन हो तुम कब से सोच रहे हो, 
सुनो! वही मर्द है ये,
जिसे तुमने हर रोज शीशे में देखा है।




एक समय था 
जब हिन्दू 
ब्राह्मण राजा 
रावण से 
अपनी पत्नी को छुड़ाने
के लिए 
वनवासी राम को 
लंका पर चढ़ाई 
करनी पड़ी 




संतोषी अंतर मन 
पुलकित हो गात सदा, 
जीवन को खेल समझ 
बढ़ती हो बात सदा ! 

विराग ना राग रहे 
अनुराग बहे भीतर, 
उन्माद पिघल जाये 
बस जाग रहे भीतर ! 




बुद्धिमान गदहा
व्यापारी ने एक नहीं मानी।
हारकर धोबी ने व्यपारी  को 
अपना गदहा दे दिया।
गदहे को अपने मालिक की 
विवशता देखी नहीं जा रही थी।
सोचा व्यपारी के साथ ना जाए।
पर नहीं जाने से भी 
उसके मालिक को पर



सादर समर्पित
सादर वंदन

4 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात! शायद नहीं पक्का ही बनेगी, सुंदर अंक, आभार दिग्विजय जी!

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह बहुत ही मनोरम प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  3. सुन्दर लिंक्स का संयोजन, मेरी कविता को स्थान देने के लिए हार्दिक धन्यवाद सर 🙏🙏

    जवाब देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।