शीर्षक पंक्ति: आदरणीय शांतनु सान्याल जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। युद्दों में अधिकांश महिलाएँ और बच्चे असह पीड़ा भोगते हैं। महिलाओं को युद्ध में हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता रहा है।
अब यह सिलसिला रुकना चाहिए। युद्द के बाद भी दोनों पक्ष शांति वार्ता करते हैं तो युद्द से पहले क्यों नहीं। सनकी बूढ़ों का ईगो हर्ट होना मासूमों की ज़िंदगी से खिलवाड़ का अधिकार कैसे बन गया?
बहरहाल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएँ।
रविवारीय अंक में पढ़िए चुनिंदा रचनाएँ-
निशा नील परिधान
में,
रुपहले बूटे चमक रहे थे।
कदम रखा निशापति ने,
निशा थी थिरकने
लगी।।
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कुछ देर और
ज़रा जी लें बंद
पंखुड़ियों के मधुरिम
आवास में, कुछ
पल ग़र मिल
जाए, ये
ज़िन्दगी
फिर
बदलने को है एक गहन छटपटाहट के साथ
रात बस ढलने को है।
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अपने इतने अहम और महत्वपूर्ण साम्राज्य के बारे में अपने ही देश के लोगों की जानकारी नगण्य सी है ! उसी को प्रकाश में लाने का उपक्रम मार्च, 2021 में किया गया, जब अहोम साम्राज्य के सेनापति लाचित बोड़फुकन को, जिनका जन्म 24 नवंबर, 1622 को हुआ था और जिन्होंने 1671 में हुए सराईघाट के युद्ध में अपनी सेना का प्रभावी नेतृत्व करते हुए मुगल सेना का असम पर कब्जा करने का प्रयास विफल कर दिया था, भारत की "आत्मनिर्भर सेना का प्रतीक'’ की उपाधी प्रदान की गई ! इसके अलावा उनके नाम का एक स्वर्ण पदक भी जारी किया गया जो राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के सर्वश्रेष्ठ कैडेट को प्रदान किया जाता है !*****
विभागाध्यक्ष के केबिन के बाहर पाँच और उम्मीदवार थीं, सभी एम.एससी. (M.Sc.) अंतिम वर्ष के विद्यार्थी. शगुन अकेली थी जो अभी बी.एससी. (B.Sc.) के आखिरी सेमेस्टर में थी. उसकी धड़कनें तेज़ थीं, पर इरादा स्थिर.
एक-एक कर सभी को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया. शगुन सबसे आखिरी थी.
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बेटी के सामने सरेआम फांसी पर लटके और
मुस्कुराते पिता ने ही लिख दी थी ईरान की बर्बादी की कहानी
दर्दनाक स्केच-जब पिता को अंतिम बार देखा
यह बेहद दुखद चित्र ईरान की महना अहमदी ने बनाया है, जिसमें उसके पिता हामिद को फांसी पर लटकाया जा रहा है, जबकि वह और उसकी मां यह सब देख रही हैं. इस दृश्य में, महना और उसकी मां एक फांसी के तख्ते के बगल में हाथ पकड़े खड़ी हैं, जिसके नीचे उसके पिता एक ब्लॉक पर खड़े हैं। उसने यह चित्र अपने पिता को अंतिम बार देखने के इंतजार में बनाया है।
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फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव
शानदार अंक
जवाब देंहटाएंआदत के मुताबिक सुबह उठ गए
देखे प्रस्तुति सामने खड़ी है
विश्व महिला दिवस की बधाई
शुभकामनाएं
सादर
बेहद खूबसूरत प्रस्तुति
जवाब देंहटाएं