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शनिवार, 14 फ़रवरी 2026

4653 ...तुम्हारे अधरों की मिठास तृप्त कर जाती है

 सादर अभिवादन 



आज वेलेन्टाईन डे हैऔर
हमारे भारत में
वसंत का महीना चल रहा है
***
इंसान 
इंसान होता है 

और वो स्वामी भक्त
नहीं होता,

कुकुर तो
कुकुर होता है 
स्वामी भक्त
जो इंसान नहीं होता

दोनों में स्वाभाविक अंतर होता है। 

रचनाएं देखें




उगता सूर्य
क्षितिज की लालिमा
भोर का गान
 

फूलों के हार
अगर की खुशबू
देवों का मान






नवांकुरों के, ज्ञान चक्षु खोल,
जीवन उजियारा करती 
कलम स्याही संग,शब्द उकेर,
कल्पनाएं, जीवंत कर देती 
तूलिका से, कैनवास में 
जीवन के रंग भर देती 





शून्य  की  संवेदनाएँ  सच्ची  होती  है
साथ  चलती  हुई   दुआओं   में
दीये  की   पीली   रोशनी  सी
अपने  विश्वास  का  उत्सव  मनाती   
कभी  बिफरने  नहीं  देती  




माँ को नित यही प्रार्थना करते देखा
जब बालक ने तो उत्सुकतावश पूछा
बोने की बात करे यह कैसी है वंदना ?
माँ ने हाथ जोड़े फिर सोच कर कहा
जानते हो ना धरा से जन्मी हैं मां सीता




हमें ज़िंदा रखा जाता है—
बस इतना भर,
कि हम धीरे-धीरे मरते रहें,
और हर चुनाव में
अपनी ही मौत पर
मुहर लगाते रहें।

हम मारे जा रहे हैं—
और ताली भी
हम ही बजा रहे हैं।






जी हाँ ! उत्तराखंड के उत्तरकाशी से 160 किमी की दूरी पर टौंस वन प्रभाग, पुरोला देवता रेंज के अंतर्गत मोरी-त्यूणी सड़क मार्ग पर टौंस नदी के किनारे स्थित है एक अनोखी समाधि ! जिसका एशिया के सबसे बड़े चीड़ के वृक्ष, जिसे पर्यावरण मंत्रालय ने ''महावृक्ष'' की उपाधि प्रदान की थी, की याद को बनाए रखने के लिए वन विभाग द्वारा निर्माण किया गया है ! इसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है ! पर जिन्हें इस अनोखी और सुरम्य जगह का पता है, वह यहां मौका मिलते ही जरूर आते हैं !



तुम्हारे अधरों की
मिठास
तृप्त कर जाती है
जीवन की हर प्यास,
मृगतृष्णा-सा मन
भटकता रहता है
मरीचिका के उजास।




आज हठी ने 
ठान लिया है
अपने को ही नोच
नीति नियम क्यों

ताखे पर रख
अनुशासन का 
कभी स्वाद चख



आज का अंक
कुछ भारी हो गया है
झेल लीजिएगा
सादर वंदन

6 टिप्‍पणियां:

  1. व्यस्त रखता हूँ अपने आप को
    रोज पढ़ता हूं
    एक रचना रोज चुनता हूं
    और प्रस्तुत कर देता हूँ
    सादर वंदन

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर रचनाओं से रूबरू हुआ
    साधुवाद

    जवाब देंहटाएं
  3. क्रम से पढ़ी कुछ रचनाएं .. दिल खुश हुआ ! आबाद रहें लिखने वाले ! मेरी रचना को भी शामिल किया , बहुत शुक्रिया ! शेष पढ़ना बाकी है ।

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह!! पढ़ने के लिए कितना सारा साहित्य सजा दिया है आपने आज के अंक में

    जवाब देंहटाएं
  5. दिग्विजय जी,
    सम्मिलित करने हेतु अनेकानेक धन्यवाद ! स्नेह बना रहे 🙏

    जवाब देंहटाएं

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