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शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

4645....यात्राओं का अंत कभी मंजिल पर नहीं...

 शुक्रवारीय अंक में 
आप सभी का हार्दिक अभिनंदन।
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इस संसार  में सभी को अपनी ज़िंदगी में कुछ न कुछ चाहिए, नाम, यश, पैसा, प्रेम, परिवार, स्थिरता, सुख, भोग और सुरक्षा, जो कुछ भी इस नश्वर संसार में भावनात्मक अस्तित्व में है। कोई न कोई शिकायत या लगातार किसी न किसी अभाव से जूझते रहते लोग और उसी अभाव को भरने के लिए जीवन भर दौड़ते भी हैं।
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ख़ानाबदोश की प्रश्नवाचक यात्रा -सी
दर-ब-दर भटकती है ज़िंदगी
समय की बारिश के साथ
बहता रहता है उम्र का कच्चापन
देखे-अनदेखे पलों के ब्लैक बोर्ड पर
उकेरे
तितली,मछली,फूल, जंगल
चिड़िया,मौसम, हरियाली, नदी,
 सपनीले चित्रों के पंख
अनायास ही पोंछ दी जाती है
बिछ जाती है 
पैरों के नीचे
ख़ुरदरी , कँटीली पगडंड़ियाँ...
जिनपर दौड
कर आकाश छूने की
लालसा में ख़ुद को
भुलाये बस भागती
रहती है ज़िंदगी...।
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-श्वेता


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आज की रचनाऍं- 
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हर यात्री को लौटना होता है वहीं,
जहाँ से वह चलता है।
लौट आना प्रकृति है,
लौट आना प्रेम है।
यात्रा में लौटना यात्रा का सबसे अहम भाग है।
यात्राओं का अंत कभी मंज़िल पर नहीं
हमेशा प्रस्थान बिंदु पर ही होता है।



दाएं देखो 
बाएं देखो 
देखो सिग्नल बत्ती,
पटना, काशी 
दिल्ली, दमदम 
या गोवा, कवरत्ती,
मोबाइल से 
बात न करना 
रखना कम रफ़्तार.




बंधन हजारों बाँधे रिस रहे घाव से

झूठी मुस्कान पहन खूब खिलखिलाता 


कौन बढ़े, नाम करे, किसका गुणगान हो?

झाँके जब ह्रदय में कोई नहीं पाता  


छाया का झूठ कभी नजर आये भी जब 

मगरूरी की आड़ में उसको छुपाता 




भ्रम में मत रहो, 
मैं तुम्हारे पैरों में हूँ, 
पर अपने लिए नहीं, 
तुम्हारे लिए। 



लड़का हँसा: "बोर्ड का नियम है. यह हमारा 'लीगल एड्रेस' है. असली 'एजुकेशनल एड्रेस' तुम्हारा कोचिंग है."

लीगल एड्रेस. एजुकेशनल एड्रेस.

आयुष सोचने लगा: "यहाँ हमें 'विद्यार्थी' कहते हैं, पर यहाँ कोई विद्या नहीं. यहाँ बस बोर्ड परीक्षा में बैठने का लाइसेंस है."

प्रैक्टिकल रिकॉर्ड जमा हुआ. बिना देखे सिग्नेचर. पूरी प्रक्रिया में पाँच मिनट.

जाते-जाते उसने बोर्ड को फिर देखा: "शिक्षा ही उन्नति है." आज यह वाक्य झूठा लगा.





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आज के लिए इतना ही
मिलते है अगले अंक में।
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7 टिप्‍पणियां:

  1. आभार
    सारी रचनाएं अनछुई
    आद्यान्त पढ़ी जाएंगी
    वंदन

    जवाब देंहटाएं
  2. सुप्रभात! विचारणीय भूमिका और पठनीय रचनाओं का संयोजन, आभार श्वेता जी!

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत अच्छी प्रस्तुति. आभार

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह! लाजवाब शुरुआती अशआर! बहुत सुंदर संकलन!

    जवाब देंहटाएं

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