हृदय से सर्वदा ज्ञानशक्ति प्रदात्री सरस्वती की वंदना करती हूँ।
ब्रह्मरूपिणी,सर्वव्यापिनी,चर-अचर मूढ़ जगत में बुद्धिरूपिणी देवी माँ सरस्वती को शत-शत नमन।
मानसिक प्रदूषण से रक्षा करने वाली देवी के आगमन से संपूर्ण प्रकृति उल्लासित और श्रृंगारित होने लगती है। वृक्षों में नूतन किसलय,चित्ताकर्षक पुष्पों की सुवासित छटा, आम्र मंजरियों से लदी अमराई में कोयल की कूक एवं भ्रमरों के गान, सरस रागिनी प्रकृति सौंदर्य को सुशोभित करते हैं, बसंती हवाओं की सुगंध कण-कण में बिखर जाती है। हर्षित धरा का गान हृदय में प्रेम और पवित्रता का संचार करते है। जग के झमेले से हटकर अपनी व्यस्त दिनचर्या से कुछ समय निकालकर आप भी प्रकृति के उत्सव को महसूस कीजिए।
साहित्य के बसंत महाप्राण निराला जी की पुण्य स्मृति को सादर नमन।
मुक्त छंद (स्वच्छंदता) के प्रवर्तक, व्यक्तिगत सुख-दुख की मार्मिक अभिव्यक्ति, प्रकृति चित्रण, क्रांति और विद्रोह की चेतना, सामाजिक यथार्थ का चित्रण (शोषितों के प्रति सहानुभूति), रहस्यानुभूति, आत्म-गौरव, ओज और औदार्य तथा भाषा की विविधता (सरल से संस्कृतनिष्ठ तक) सूर्य कांत त्रिपाठी निराला के लेखन की प्रमुख विशेषताएं हैं, जो छायावाद से प्रगतिवाद तक के सफर को दर्शाती हैं।
इन दिनों मुझे तमिल फिल्में देखने का चस्का लग गया है. बेशक, दक्षिण भारतीय फिल्मों में पर लाउड होने का आरोप लगता है और ज्यादातर मामलों में सही हो होता है. पर अब हिंदी फिल्में लाउड हो रही हैं और ज्यादातर हिंदी फिल्मों में कथानक गुम हो रहा है...
अब वह सोच रहा था कि इस पत्र का क्या करे? पहले मन किया कि वह पत्र को फाड़ कर डस्टबिन के हवाले कर दे. फिर विचार आया ... नहीं, यह भागना होगा. जवाब लिखना चाहिए, और शगुन को सब कुछ समझा देना चाहिए. पर कैसे? उसे खुद कुछ समझ नहीं आ रहा था. वह लिखे क्या? आखिर विचार आया अभी कुछ मत करो. वह उठा और उसने पत्र को सूटकेस में सबसे नीचे दबा कर रख दिया. जैसे किसी राज को दफ्न कर दिया हो. उसने महसूस किया उसका गला सूख रहा है. उसने अपनी बोतल उठाई और एक साँस में उसे मुहँ के जरीए अपने पेट में उड़ेल लिया
एक दिन पहुंच ही जाएंगे आकाशगंगा के किनारे, यूँ तो आज नहीं ज़ेब में एक भी ढेला, शून्य में थमा हुआ सा लगे है सांसों का हिंडोला । छोटी छोटी खुशियों में रहते हैं शामिल लंबे उम्र के राज़,
खुद के गुमान में डूबे ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि जब आपका व्यवहार, बर्ताव, कथनी करनी का फर्क, ढोंग या उदण्डता लोगों को बार-बार दिखाई देती है, तो वे आपको नकार देते हैं ! आपका समाज को खंडित, विखंडित करने या देश को तनावग्रस्त या कमजोर करने का प्रयास जनता कतई बर्दास्त नहीं करती ! झूठे किस्से, कहानियों, आरोपों को वह समझने-पहचानने लगी है ! समय बदल रहा है, जितनी जल्दी हो समझ व संभल जाएं नहीं तो अप्रासंगिक होते देर नहीं लगेगी ! हाल ही के बहुतेरे उदाहरण सामने हैं ! बड़े-बड़े तीसमारखाँ निपटा दिए जनता ने ! क्योंकि अब देश के अवाम को राष्ट्रबोध, स्वयंबोध, शत्रुबोध, इतिहासबोध अच्छी तरह होने लगा है ! अब वह बहकावे में नहीं आती !
इस बार ग़ज़ल कुंभ का आयोजन धर्म और अध्यात्म की प्राचीन नगरी काशी (बनारस-वाराणसी)में 10/11जनवरी,2026 को हुआ।इस बार इस कार्यक्रम में हम सभी साथियों ने ग़ज़ल पाठ तो किया ही साथ ही अपने परिजनों के संग पावन नगरी काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन तथा बौद्ध धर्म के प्रमुख तीर्थ सारनाथ जैसे ऐतिहासिक महत्व के स्थलों के भ्रमण का आनंद भी लिया।
भारतीय सिनेमा के एक दिग्गज कवि, गीतकार और पटकथा लेखक हैं। उनका जन्म 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में हुआ था। वे हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा व्यक्तित्व में से हैं जिन्होंने शब्दों के माध्यम से भारतीय समाज और सिनेमा की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
जावेद अख़्तर भारतीय सिनेमा और साहित्य के एक ऐसे स्तंभ हैं, जिनका लेखन अपनी सादगी, गहराई और सामाजिक चेतना के लिए पहचाना जाता है। उनकी शैली को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है: पटकथा लेखन, गीत और कविता।
जावेद अख़्तर की सबसे बड़ी खूबी उनकी भाषा की सादगी है। उनके अनुसार, लेखन ऐसा होना चाहिए जिसे अधिक से अधिक लोग आसानी से समझ सके। वे कठिन उर्दू या हिंदी शब्दों के बजाय बोलचाल की भाषा का उपयोग करते हैं, जिससे उनके गीत और कविताएँ सीधे दिल को छूती हैं।
उनके फिल्मी गीत मात्र मनोरंजन नहीं होते, बल्कि उनमें जीवन के गहरे फलसफे छिपे होते हैं। लगान, कल हो ना हो और दिल चाहता है जैसी फिल्मों में उनके लिखे गीत मानवीय भावनाओं और अस्तित्व के सवालों को खूबसूरती से व्यक्त करते हैं।
तरकश,लावा,इन अदर वर्ड्स इनकी प्रमुख कृतियॉं है।
वे केवल एक लेखक ही नहीं, बल्कि एक प्रखर वक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। वे राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। जावेद अख्तर सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दों पर निडरता से अपनी राय रखने के लिए जाने जाते हैं।