---

सोमवार, 26 मई 2025

4500 ...अचानक पाँच लिंकों से प्रस्तुति का सस्नेह आमंत्रण मिला, सो हाजिर हूँ।

 सादर अभिवादन

 कल आपको 

आदरणीय रेणु जी पसंदीदा रचनाएँ 
पढ़ने को मिलेंगी।

आज की रचनाएँ



किसी काम के नहीं निकले तुम भी
भुवन भास्कर !
हैरान हूँ, दुखी हूँ, कुपित हूँ तुम्हारा यह
लिजलिजा सा रूप देख कर !
जब आया समय परीक्षा का
हो गए तुम भी बुरी तरह फेल,






जल स्पर्श से गहराई का अंदाज़ नही होता,
टोह पाने के लिए पानी में उतरना है
ज़रूरी, ये दुनिया है सितमगर
सरल रेखा पर चलने नहीं
देगी, साहिल न सरक
जाए बहोत दूर,
वक़्त से
पहले





सत्ता को स्थापित करने के लिए अजब -गजब कहानियों का यह दौर आधुनिक और नए भारत में नहीं चलना चाहिए। देवदत्त पटनायक के अनुसार पश्चिम भारत की एक कहानी में ऋषियों की मुलाक़ात ऐसे पुरुष से हुई थी जो नाग के फन के नीचे सोए रहकर धूप से बचते थे या फिर कुछ शेर से दो-दो हाथ कर लेते थे। गुजरात के चावड़ा राजवंश के अनुसार एक राजकुमार इसलिए अलौकिक बताए गए क्योंकि वह झूले में पड़े रहते थे और धूप उन्हें स्पर्श भी नहीं कर पाती थी जबकि ऐसा पेड़ की छाया के स्थिर रहने के कारण होता था। आज ऐसी हर कहानी के जवाब विज्ञान के पास हैं। आज़ाद भारत में सब नागरिक बराबर और समान हैं। सब में देवत्व है क्योंकि सबके जन्म लेने की प्रक्रिया भी एक है। हां, प्रशिक्षण और अभ्यास ज़रूर किसी को भी खास बना सकता है। नए भारत को जो चकमा देने वाली कहानियों  की बजाय उड़िया कहानीकार बानू मुश्ताक़ के कहानी संग्रह 'हार्ट लैंप' को पढ़ना चाहिए जिन्हें अनुवादक के साथ अंतर्राष्ट्रीय बुकर सम्मान मिला है।





सिलसिला यही चला उम्र भर
इसी के चलते वह पुल हाथ नहीं लगा
जिसपर चलकर
किसी अदृश्य को दृश्य में तब्दील कर
उसके भीतर के यथार्थ की चिंगारी को
हवा दी जा सके






कहना ये था कि मुझे तुमसे प्यार है,
पहले तुम इजहार कर पाओगे क्या।

 जीवन सरल बनाने का एक तरीका है,
 तुम मेरी अर्धांगिनी बन जाओगे क्या।

आज के लिए इतना ही

सादर वंदन

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूबसूरत प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  2. हार्दिक आभार प्रिय दीदी। पञ्च लिंको के माध्यम से आपका साहित्य प्रेम वंदनीय है। मुझे याद किया सो हाजिर होना ही था 🙏

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह वाह ! बहुत सुन्दर सूत्रों से सुशोभित आज की हलचल ! मेरी रचना को इसमें सम्मिलित करने के लिए हृदय से धन्यवाद यशोदा जी ! सप्रेम वन्दे !

    जवाब देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।