पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद

समर्थक

बुधवार, 11 अक्तूबर 2017

817....आंसुओं को पोंछने ख्वाबों में आ जाती है माँ

सादर अभिवादन..
तनिक सी ही सोच है..
"माँ"
औरत का एक ऐसा किरदार है,
जिसमें संपूर्णता, पवित्रता, त्याग, ममता,
प्यार सब कुछ निहित होता है।
शायद ही दुनिया का कोई अन्य रिश्ता ऐसा हो,
जिसमें इतनी सारी खूबियाँ एक साथ होती हों।
माँ हमेशा अपनी संतानों के लिए
बेहतर और भला ही सोचती है
और हर वक्त बस इसी चिंता में डूबी रहती है
कि मेरी संताने कहाँ और कैसी होगी किस हाल में होगी।

हम भले ही कितने ही समझदार गंभीर
व उम्र में बड़े हो जाएँ परंतु माँ की चिंता
हमारे लिए तब भी वैसी ही रहती है,
जैसी कि बचपन में होती थी।

स्मृतिशेष श्रीमति ऊषा सिंह
आज का अंक मेरी सखी पम्मी जी की
माताश्री स्मृतिशेष श्रीमति ऊषा सिंह
को समर्पित है यह अंक.....


ममता की मूरत

ममता की मूरत...
क्या सीरत क्या सूरत थी
माँ ममता की मूरत थी
पाँव छुए और काम बने
अम्मा एक महूरत थी
बस्ती भर के दुख सुख में
एक अहम ज़रूरत थी

माँ-माँ संवेदना है
माँ संवेदना है.....
माँ, माँ-माँ संवेदना है, भावना है अहसास है
माँ, माँ जीवन के फूलों में खुशबू का वास है,

माँ, माँ रोते हुए बच्चे का खुशनुमा पलना है,
माँ, माँ मरूथल में नदी या मीठा सा झरना है,

माँ, माँ लोरी है, गीत है, प्यारी सी थाप है,
माँ, माँ पूजा की थाली है, मंत्रों का जाप है,



माँ..मेरी माँ
मुझको हर हाल में बख़्शेगा उजाला अपना
चाँद रिश्ते में तो लगता नहीं मामा अपना

मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू
मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना

माँ की ममता hindi poem on mother
माँ की ममता...
जब परेशानी में फँस जाते हैं हम परदेस में
आंसुओं को पोंछने ख्वाबों में आ जाती है माँ

मरते दम तक आ सका न बच्चा घर परदेस से
अपनी सारी दुआएं चौखट पे छोड़ जाती है माँ



बेसन की सोंधी रोटी....
बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ ,
याद आता है चौका-बासन, चिमटा फुँकनी जैसी माँ

बाँस की खुर्री खाट के ऊपर हर आहट पर कान धरे ,
आधी सोई आधी जागी थकी दुपहरी जैसी माँ

ईश्वर से केवल एक ही निवेदन
वे किसी से किसी की
"माँ" न छीने....
इस अंक में प्रस्तुत सभी रचनाएँ हिन्दी व्याकरण से साभार





9 टिप्‍पणियां:

  1. शुभप्रभात दी,
    पम्मी जी की माता जी को भावभीनी श्रद्धांजलि।
    दी आज की प्रस्तुति भावनाओं से ओतप्रोत अति भावुक करने वाला है।
    माँ के लिए लिखी गयी सुंदर कविताएँ और हृदयस्पर्शी विडियो मन छू गया।

    उत्तर देंहटाएं
  2. ॐ शांति
    "पाँच लिंकों का आनन्द " में चर्चाकार पम्मी जी को हुए मातृशोक में हम सभी शामिल हैं। माताश्री की आत्मा को ईश्वर शान्ति प्रदान करे।
    उन्हें हमारी विनम्र श्रद्धांजलि।
    माँ को समर्पित आज का अंक भावुकता में डुबो देने वाला है। हृदयस्पर्शी रचनाओं का संकलन। ग़ज़ल गायकी के शहंशाह मरहूम जगजीत सिंह जी की दर्दभरी आवाज़ में (जोकि उन्होंने अपने बेटे के परलोक सिधारने को स्मरण किया ) भाव विह्वल करता विडियो।
    जीवन में सर्वप्रथम माँ शब्द से ही हमारा परिचय होता है जोकि अंत तक हमारे ह्रदय में समाया रहता है।
    आभार सादर।

    उत्तर देंहटाएं
  3. अश्रुपूरित श्रद्धांजली
    प्रतिक्रिया के लिए
    शब्द नहीं ढूंढ पा रही मैं
    आदर सहित

    उत्तर देंहटाएं
  4. आदरणीया पम्मी जी की माता जी के दिव्यपुंज को श्रीराम अपने श्रीचरणों मे स्थान दें। भावपूरित श्रद्धांजलि। बहुत अच्छी प्रस्तुति। सादर

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  6. श्रधांजली मेरी भी....
    ईश्वर उन्हे अपने चरणों में स्थान दें।

    उत्तर देंहटाएं
  7. ईश्वर की अनमोल कृति ''माँ'' को नमन। आज का अंक आदरणीया पम्मी जी की स्वर्गीय माता जी को समर्पित है। श्रद्धासुमन अर्पित करता हूँ। आदरणीया दीदी आपको भी नमन इस भाव से भरे प्रस्तुति हेतु। सादर "एकलव्य"

    उत्तर देंहटाएं
  8. माँ पर असंख्य कविताएँ, नज्में, गीत लिखी गई हैं । कविवर्य चंद्रकांत देवताले की कविता का अंश -
    "माँ ने हर चीज़ के छिलके उतारे मेरे लिए
    देह, आत्मा, आग और पानी तक के छिलके उतारे
    और मुझे कभी भूखा नहीं सोने दिया
    मैंने धरती पर कविता लिखी है
    चन्द्रमा को गिटार में बदला है
    समुद्र को शेर की तरह आकाश के पिंजरे में खड़ा कर दिया
    सूरज पर कभी भी कविता लिख दूँगा
    माँ पर नहीं लिख सकता कविता!"
    आज की रचनाओं के माध्यम से आदरणीय पम्मीजी की दिवंगत माताजी को श्रद्धांजलि देता,भावुक कर जाने वाला अंक ! मेरी ओर से भी श्रद्धासुमन ।

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...