पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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रविवार, 6 अगस्त 2017

751.... बच्चे तो हैं मगर बचपन गायब है.

जय मां हाटेशवरी....

बेहताशा बारिश हो रही है....
कभी नैटवर्क नहीं...
कभी बिजली गुल है....
आज दोनों है....
इस लिये उपस्थित हूं....

  "रिमझिम तो है मगर सावन गायब है,
 बच्चे तो हैं मगर बचपन गायब है.
 क्या हो गयी है तासीर ज़माने की यारों
 अपने तो हैं मगर अपनापन गायब है."
...देखिये आज के लिये मेरी पसंद....
 

सावन आया ... ( बालगीत )
बागों में पड़ गए हैं झूले
लगी होड़ सब में नभ छू ले
सखियां गाएं गीत मल्हार
पपिहा पी पी करे पुकार

बेहयाई से लिखे बेहयाई लिखे माफ होता है
शेर शायरी
लिखने की बातें
हैं शायरों की
ऐसा सभी सुनते हैं
बहुतों को पता होता है


दोस्ती, एक रिश्ता मीठा सा....स्मृति आदित्य
दोस्तों, शक, दोस्ती का दुश्मन है
अपने दिल में इसे घर बनाने न दो
कल तड़पना पड़े याद में जिनकी
रोक लो रूठकर उनको जाने न दो...



फ्रेंडशिप डे' पर 15 अनमोल वचन (Friendship Day Quotes in Hindi)
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राजा दशरथ का आधी रात के समय अपने प्राणों को त्याग देना
राजन ! मुझे मार डालो तुम, कष्ट नहीं होगा मरने से
एक ही थी संतान हमारी, पुत्रहीन कर दिया तुमने
की मेरे बालक की हत्या, अज्ञान वश ही निज बाण से 
दूँगा तुमको शाप भयंकर, दुखी होगे पुत्र वियोग से
हो क्षत्रिय तुम अनजाने में, वैश्य मुनि का वध कर डाला  
ब्रह्महत्या नहीं हुई है, फिर भी होगी दुखद अवस्था
फल प्राप्त जैसे करता है, दक्षिणा देने वाला दाता
हर ले प्राण भयानक ऐसी, शीघ्र मिलेगी तुम्हें अवस्था
इस प्रकार शापित कर मुझको, अति करुणाजनक विलाप किया
जलती हुई चिता में जाकर, दोनों ने तब प्रस्थान किया


शरीफा और चारआना
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मगर हमारे साथ बड़ी मुश्‍कि‍ल थी। हमारी बेहद पसंदीदा चीज उनके कब्‍जे में थी। हम कि‍तना भी कोशि‍श कर लें, उनकी आंखों के नीचे से नि‍कल आना नामुमकि‍न था।
दरअसल मुझे और मनु को शरीफा यानी सीताफल बेहद पसंद थे और बड़ा के बगान में इसके पांच पेड़ थे जो मौसम पर फलों से लद जाते और हमें ललचाते। हम इस फि‍राक में रहते कि‍ कैसे पेड़ से फल तोड़े जाए। हम दोनों कक्षा तीन में थे। स्‍कूल से आने बाद कोई काम नहीं। खेलते रहते इधर-उधर। मनु और मैं शरीफा के पेड़ में फूल से फल आने और उसके बड़े होने फि‍र उनका रंग हरा से हल्‍का सफेद होने का इंतजार करते। इसके पहले फल तोड़कर भी कोई फायदा नहीं था क्‍योेंकि‍ कच्‍चे फल में कोई स्‍वाद नहीं आता। हम ललचाई आंखों से शरीफे के पकने का इंतजार करते। हालांकि‍ घर में सभी फल आते थे, मगर पेड़ पर पके शरीफा का स्‍वाद अतुलनीय होता है।


वो लड़ना, वो झगड़ना और वो मना लेना,
यही होता है भाई बहन का प्यार,
और इसी प्यार को बढ़ाने आया है,
रक्षा बंधन का त्यौहार।
कल ही ये पावन त्योहार है....
आप सभी को मेरी ओर से पावन रक्षा बंधन की शुभकामनाएं...
चलते-चलते...आदरणीय कविता दीदी की ये इस पावन पर्व पर  रचना भी अवश्य पढ़ें...



बांध कलाई में राखी बहिना अपना प्यार जताती है
रक्षाबंधन-भैया दूज पर बहिन-भैया
मिलन के दो पावन प्रसंग आते हैं।
बहिन के लिए जो अद्भुत, अमूल्य,
अनंत प्यार को सन्देश लाते हैं।।
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रक्षा पर्व पर बीते दिनों की आप बीती
बताने का सुगम सुयोग बनता है।
जहाँ बहिन-भैया को एक-दूजे का
सुख-दुःख बांटने का अवसर मिलता है।।


धन्यवाद।
 











5 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात भाई कुलदीप जी
    बेहतरीन रचनाएँ चुनी आपने
    साधुवाद
    सादर..

    उत्तर देंहटाएं
  2. उम्दा लिंक्स। मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर हलचल में मेरी पोस्ट शामिल करने हेतु आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  4. रक्षाबन्धन पर्व शुभ हो। आभार कुलदीप जी 'ऊलूक' की बेहयाई को आज की प्रस्तुति में जगह देने के लिये।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेहतरीन लिंक्स। मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार।

    उत्तर देंहटाएं

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