पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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मंगलवार, 23 मई 2017

676.....खाली पन्ने और मीनोपोज

सादर अभिवादन..
नए नियमों के तहत 
आज-कल काफी उथल-पुथल है
31 जुलाई तक विवरणियाँ दाखिल हो जानी चाहिए..
इसी चक्कर में श्रीमान जी काफी से अधिक व्यस्त हैं
कुछ फाइलें मेरे पास भिजवा दी है उन्होंनें..
ऑडिट करना है..ऑफिस से दो स्टाफ घर आए हैं..
चलिए छोड़िए इस पचड़े को...देखिए आज की पसंद...

वो पेड़ो पर चढ़ना, गिलहरी पकड़ना,
अमिया की डाली पर झूले लगाना,
वो पेंगें मारके  बेफिकरी से झूलना,
वो मामा और मासी का मनुहार करना,
मेरे रूठ जाने पर मुझको मनाना,
पाने फिर इनको कहाँ जाइये?
मुझे मेरा बचपन पुनः चाहिए!


आइना संगसार करना था.......नीरज गोस्वामी
दिल हमें बेकरार करना था 
आपका इंतिज़ार करना था 

जिस्म को बेचना गुनाह नहीं 
रूह का इफ़्तिख़ार करना था 



बढ रही दरिन्दगी समाज में,
नारी ! तेरे फर्ज और बढ गये .......
माँ ! है तू सृजन है तेरे हाथ में,
"अब तेरे कर्तव्य औऱ बढ गये".......

न जाने क्यूँ
हम खुद की ख्यालात लिए फिरते हैं कि
हर इन्सान में अख्यात खुदा बसता है
तो वो जो इन्सान है, इन्सान में कहाँ रहता है?


विश्वास....शुभा मेहता
अटकूं कहीं तो 
इशारा करता है तू ही 
भटकूं कहीं तो 
साथ देता है तू ही 
आकांक्षाएं , एक के बाद एक
बढ़ती चली जाती 




गर मेरे एहसास कुछ नहीं
तो फिर मेरे पास कुछ नहीं

आँखों में ये आँसू तो हैं
हाँ कहने को खास कुछ नहीं

शीर्षक तो भूल रही हूँ....

बात पते की...डॉ. सुशील जोशी

सफेद पन्ने 
खाली छोड़ना 
भी मीनोपोज 
की निशानी होता है 

तेरा इसे समझना 
सबसे ज्यादा 
जरूरी है
बहुत जरूरी है ।

आज्ञा दें यशोदा को...
सादर




10 टिप्‍पणियां:

  1. ढ़ेरों आशीष व असीम शुभकामनाओं के संग शुभ दिवस छोटी बहना
    व्यस्तता मकडजाल
    उम्दा प्रतुतीकरण

    उत्तर देंहटाएं
  2. आदरणीय,सुन्दर व रोचक प्रस्तुति ,आभार। "एकलव्य"
    आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर हलचल प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  4. आज की हलचल में मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर संकलन......
    मेरी रचना को यहाँ स्थान देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद, यशोदा जी !
    सादर आभार...

    उत्तर देंहटाएं
  6. पचड़े को छोड़ दे पर पचड़े हमें छोड़े तब ना :) आप भी यशोदा जी । चलिये दिल इसी से बहला लेते हैं ना गालिब रहा ना उसका खयाल । बहुत सुन्दर प्रस्तुति और अझेल 'उलूक' की एक और बकवास को आप के यहाँ ले आने पर आभार भी ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. अत्यंत सुन्दर संकलन......
    मेरी रचना को यहाँ स्थान देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद, यशोदा दी !😊😊

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर संकलन,बचपन की मीठी यादें,
    नारी विमर्श , जीवन की सच्चाई मानव मन मे उठते ख्यालात ।

    उत्तर देंहटाएं

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