पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

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गुरुवार, 11 मई 2017

664...पाठकों की पसंद....आज ध्रुव सिंह "एकलव्य" की पसंदीदा रचनाएँ

सादर अभिवादन..
पाठकों की पसंद का दूसरा अंक
आज के पाठक हैं
श्री ध्रुव सिंह जी "एकलव्य"
देखिए व पढ़िए ध्रुव सिंह जी "एकलव्य" की पसंदीदा रचनाएँ...
भाग्य ! तेरा
कर्म !तेरा
मर्म में
लिपटा  हुआ
चिरस्थाई
अक़्स ! तेरा
भृकुटि तनी है ! तेरी
कुछ पक रहा,
आने से उनके
कुछ जल रहा
मनमाने से उनके,

रंगीन ख्वाबों सी आँख में भरी तितलियाँ
ओस की बूँदों सी पत्तों पे ठहरी तितलियाँ

गुनगुनाने लगा दिल बन गया चमन कोई
गुल  के पराग लबों पे बिखरी तितलियाँ

क्या कोई तिलिस्म है ये
या गहरा है कोई राज ये,
या है ये हकीकत,
या है ये बस इक तसब्बुर की बात।

है राहें औऱ भी नजरे तो उठा !
उम्मीदें बढा फिर चलें तो जरा !
वजह मुस्कुराने की हैं और भी,
जो नहीं उस पर रोना तो छोड़े जरा...
यही सीख जब  अपनाने लगी
एक नयी सोच तब मन में आने लगी

:: पाठक परिचय ::
ध्रुव सिंह "एकलव्य"
dhruvsinghvns@gmail.com
"सरल संदेशों में लिपटा हूँ, 
मैं अनजाना राही ,
चंद शब्द में, 
बात मैं कहता ,
कालजयी कलम का सिपाही "
इनका छोटा सा परिचय काफी बड़ी बाते बयां करती है
-दिग्विजय

हम श्री ध्रुव सिंह जी के आभारी हैं

 सोचने का विषय है कि
पाठक गण स्वतः स्फूर्त आगे नहीं आ रहे हैं
हम उन्हें इतना शानदार मंच प्रदान कर रहे हैं
जो उन्हें आगे बढ़ने में सौ प्रतिशत मदद करेगा
सादर





21 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात..
    वाह...
    शुक्रिया ध्रुव सिंह भाई
    आपकी पसंद काबिले तारीफ़ है
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. एकलव्य जी आपकी तारीफ जितनी भी करूँ कम होगी। विविधतापूर्ण प्रस्तुतिकरण ।।।

    उत्तर देंहटाएं
  3. आदरणीय , 'दिग्विजय साहब' एवं 'यशोदा' दीदी सर्वप्रथम मैं आप सब को हृदय से धन्यवाद देता हूँ आपके इस सार्थक प्रयास के लिए। एक युवा कवि होने के नाते देश की समस्याओं को साहित्यिक रूप देकर लोगों तक पहुँचाना, भविष्य में मेरा प्रयास होगा। इसके लिए आपसभी प्रबुद्ध जनों के प्रोत्साहन का आकांक्षी हूँ ,अंत में मेरी चंद पंक्तियाँ,

    नहीं चाहता मान उपाधि
    नहीं चाहता ज्ञानपीठ
    रोको मत ! लेखनी
    चलने दो !
    शब्द सत्य हों,
    कालजयी !

    आभार। "एकलव्य"

    उत्तर देंहटाएं
  4. सच तो विचारणीय विषय हैं कि आपके द्वारा इतना अच्छा शानदार मंच प्रदान किया जा रहा है और पाठकगण आगे नहीं आ रहे हैं, जबकि इससे लाभ उनको ही है। .
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपके विचार हमारे लिये महत्वपूर्ण हैं ,आभार। "एकलव्य"

      हटाएं
  5. बहुत बढियाँ संकलन।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ ,धन्यवाद।

      हटाएं
  6. क्या बात है ध्रुव जी...सुंदर संकलन👌👌👌
    बहुत बहुत आभार शुक्रिया आपका

    उत्तर देंहटाएं
  7. ध्रुव जी सही चुनाव किया आपने। धन्यवाद।
    खासकर जूतियाँ!औऱ तितलीया।

    उत्तर देंहटाएं
  8. "पाँच लिंकों का आनंद" की यह प्रस्तुति रचनाकर्म के नए द्वार खोलती है। साइट की ओर से प्रक्रिया सम्बन्धी और अधिक स्पष्टीकरण उदहारण के साथ पेश होने पर ज़्यादा से ज़्यादा पाठकों की रूचि जागेगी इस मंच का प्रतिभागी बनने की। एकलव्य जी सहित सभी रचनाकारों को बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. हृदय से स्वागत है ,आभार। "एकलव्य"

      हटाएं
  9. बहुत ही बढियासंकलन....
    मेरी रचना सम्मलित करने हेतु हृदय से आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत ही बढिया संकलन।

    उत्तर देंहटाएं
  11. उत्तर
    1. आपके विचारों का हृदय से स्वागत है। आभार "एकलव्य"

      हटाएं

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