पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

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रविवार, 7 मई 2017

660....पाठकों की पसंद....आज कविता दीदी की पसंदीदा रचनाएँ

सादर अभिवादन...
पहली बार पाँच लिंकों का आनन्द में
पाठकों की पसंद के अन्तर्गत
आपके समक्ष पेश करती हूँ...
कविता दीदी (कविता रावत) की पसंद की रचनाएँ..

यूँ ही कोई किसी की सुध नहीं लेता 
बिन मांगे कोई किसी को कब देता 
जब तक विप्र सुदामा नहीं गए मांगने 
सर्वज्ञ कृष्ण भी कब गए उनके आंगने 
महलों का सुख, झोपड़ी को है जलाता 

वे कलियाँ जो भ्रमित होकर
अपने को पूर्ण खिला 
समझ बैठती है 
पड़ जाती है 
कुछ असामाजिक तत्वों के हाथ 
उनका इस कदर खिल जाना
बन जाता है अभिशाप


शादी-ब्याह की मौज-मस्ती में
“जब-जब मुझे किसी की शादी का निमंत्रण पत्र मिलता है 
तब-तब मुझे 30 नवम्बर का वह दिन खूब याद आता है। 
जब दुल्हन बन मंच पर बैठी तो लगा रानी बन गई हूँ। 
अब किससे कहूँ रोबोट बनी उस रानी को ढूंढ़ रही हूँ।" 


संगति का प्रभाव
हँसमुख साथ मिल जाय तो सुनसान रास्ता भी आराम से कट जाता है 
अच्छा साथ मिल जाने पर कोई रास्ता लम्बा नहीं रह जाता है 
शिकारी पक्षी कभी एक साथ मिलकर नहीं उड़ा करते हैं 
जो भेड़ियों की संगति में रहते हैं, वे गुराना सीख जाते हैं


असहाय वेदना
वो पास खड़ी थी मेरे
दूर कहीं की रहने वाली,
दिखती थी वो मुझको ऐसी
ज्यों मूक खड़ी हो डाली।
पलभर उसके ऊपर उठे नयन
पलभर नीचे थे झपके,
पसीज गया यह मन मेरा
जब आँसू उसके थे टपके।
........

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कविता दीदी का परिचय उन्हीं के शब्दों में...

मैं शैल-शिला, नदिका, पुण्यस्थल, देवभूमि उत्तराखंड की संतति, प्रकृति की धरोहर ताल-तलैयों, शैल-शिखरों की सुरम्य नगरी भोपाल मध्यप्रदेश में निवासरत हूँ। मैंने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्‍त की है। वर्तमान में स्कूल शिक्षा विभाग, भोपाल में कर्मरत हूँ। भोपाल गैस त्रासदी की मार झेलने वाले हजारों में से एक हूँ। ऐसी विषम परिस्थितियों में मेरे अंदर उमड़ी संवेदना से लेखन की शुरुआत हुई, शायद इसीलिए मैं आज आम आदमी के दुःख-दर्द, ख़ुशी-गम को अपने करीब ही पाती हूँ, जैसे वे मेरे अपने ही हैं। ब्लॉग मेरे लिए एक ऐसा सामाजिक मंच है जहाँ मैं अपने आपको एक विश्वव्यापी परिवार के सदस्य के रूप में देख पा रही हूँ, जिस पर अपने मन/दिल में उमड़ते-घुमड़ते खट्टे-मीठे, अनुभवों व विचारों को बांट पाने में समर्थ हो पा रही हूँ।

हम कविता दीदी के आभारी हैं


हमारा अगला अंक गुरुवार दिनांक 11 मई 2017 को प्रकाशित होगा
रचनाओं के लिंक्स आमंत्रित है










14 टिप्‍पणियां:

  1. पाँच लिंकों का आनंद की ओर से पेश हुई यह प्रस्तुति नयी पहल है जोकि सराहनीय है। कविता जी की प्रस्तुति में समाहित लिंकों में वैविद्धय के दर्शन हो रहे हैं। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेहतरीन संकलन ! सार्थक प्रयास, आभार। "एकलव्य"

    उत्तर देंहटाएं
  3. शुभ प्रभात..
    पहल पसंद आई
    यह पहल तभी सफल होगी
    जब हमारे और पाठक इसमें सहभागी बनेंगे..
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  4. यशोदा दीदी ।।।।
    आपका यह सृजनात्मक प्रयास हमारे लिए उत्साहवर्धन का कार्य करेगा। आपको नमन व सुंदर संकलन प्रस्तुत करने हेतु बधाई ।

    इस प्रकार हमे कविता दीदी के बारे में जानने और उनके मर्माहत हृदय की रचनाएँ पढने का सुअवसर प्राप्त हुआ।

    कविता दीदी को भी हमारी बधाई और शुभकामनायें।।।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर। बधाई इस नये प्रयोग की शुरुआत के लिये। निरन्तरता बनी रहे शुभकामनाएं।

    उत्तर देंहटाएं
  6. हलचल की नई पहल की पहली प्रस्तुति मेरे नाम करने के लिए यशोदा जी एवं सभी चर्चाकारों का तहेदिल से धन्यवाद, आभार!
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर रचना..... आभार
    मेरे ब्लॉग की नई रचना पर आपके विचारों का इन्तजार।

    उत्तर देंहटाएं
  8. Bahut khub

    Please Vsit My Blog...

    http://rahulhindiblog.blogspot.in/?m=1

    Thank you

    उत्तर देंहटाएं

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