पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

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शुक्रवार, 10 मार्च 2017

602.........जो है क्या वो ही है

सादर अभिवादन..
बस दो दिन और
हिन्दी वर्ष का अंतिम उत्सव
होली.....पर उत्साह गायब है
या  शायद आपकी प्रतीक्षा में है....
सरकार आपको होली तक फ्री राइड करवाएगी फिर वो बस हो ऑटो टैक्सी या फिर मेट्रो क्योंकि यदि नोट लेकर निकले और किसी ने रंग भरा गुब्बारा मार दिया तो आपकी तो बल्ले बल्ले हो जाएगी न ........अब खाली जेब खाली हाथ निकालिए और काम पर चलिए ........होली है भई ,

महिलाओं को आगे लाने की बात हो तो घर से शुरुआत करनी चाहिए, सबसे जरूरी है उनकी शिक्षा व रुचि ...जैसा कि सब जानते हैं परिवार में जितने लोग होते हैं आपसी सूझबूझ और तालमेल के साथ रहें तो प्रेम बना रहता है,तालमेल का यहाँ मतलब है अपनी -अपनी जिम्मेदारी और समय संयोजन के साथ आपसी सहयोग होना।


यकीनन बुढापा दिमागी फितूर है , बड़प्पन का फितूर , लोग क्या कहेंगे का फितूर , अब हमारी उम्र हो गयी , का असर और कुछ नहीं , इसे नकारिये और पूरे जीवन स्वस्थ रहिये !


आँखों  से छलकता तेरे  प्यार है 
लब से करते फिर कैसे  इन्कार है 

महक प्यार की ढूंढते यहां वहां 
अब तो ज़िन्दगी हमसे बेज़ार है 

अब अश्लीलता का रंग 
ब्लू नहीं होता 
अब यह सिमटा नहीं 
पीली पन्नी में 
न ही सिनेमा घरों में होता है 




खुद के सीने में
जल रही होती है 
आग बहुत सारी
जलते जलते भी
एक ठंडा सा सागर
सामने ला 
कर दिखाता है
किसी किसी को
कुछ ऎसा लिखने में
भी मजा आता है
आँखों में जलन
और धुआँ धुआँ
सा हो जाता है





6 टिप्‍पणियां:

  1. ढ़ेरों आशीष व असीम शुभकामनाओं के संग शुभ दिवस छोटी बहना
    आपके चयन किये लिंक्स का क्या कहना
    सुंदर अति सुंदर

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। आभार यशोदा जी 'उलूक' के सूत्र 'जो है क्या वो ही है' को स्थान देने के लिये।

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दर प्रस्तुति, लिंक्स सुंदर

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं

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