पाँच लिंकों का आनन्द

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शुक्रवार, 13 जनवरी 2017

546.....विश्व हिन्दी दिवस और शब्द क्रमंचय संचय प्रयोग सब करते हैं समझते एक दो हैं

सादर अभिवादन
तेरहवाँ दिन
साल सत्रह का
नया तो दिखता ही नहीं
राग वही पुराना ही है

आज जो मैं पढ़ी  अब तक...


रोमन में हिन्दी लिखी, रो मन बुक्का फाड़।
देवनागरी स्वयं की, रही दुर्दशा ताड़।
रही दुर्दशा ताड़, दिखे मात्रा की गड़बड़।
पाश्चात्य की आड़, करे अब गिटपिट बड़ बड़।

सुनार कहे वह सोना, डॅाक्टर बताये वह दवाई और मैडिकल स्टोर वाला माँगे वही दवा का दाम - यही नियति रही है हम लोगों की। मगर कुछ युग-दृष्टा ऐसी नियतियों को तोड़ते भी हैं। जिन दिनों हिन्दुस्तान टू जी थ्री जी फोर जी एट्सेक्ट्रा से गुज़र रहा था उन्हीं दिनों एस वी सी फाउण्डेशन वृहत्तर सामाजिक लाभार्थ कुछ करने के प्रयत्नों में लगा हुआ था। 

दिल में दर्द बहुत है लेकर थोड़ा मरहम आ जाओ
वक़्त नहीं होगा तुम पर तुम जो है वापस ले जाओ ।

अश्क़ो की जागीर भरी है थोड़े मोती हैं बाकी
छोटा सा झोला भर लो और बाकी फेक चली जाओ।

मुझे रहने दो मेरे घर मे अकेले
ये बखूबी जनता है मेरे मिज़ाज
जब भी ख्याल बिखरते हैं
बटोर कर सहेज लेता है उन्हें

कलियाँ बनकर पुष्प, आखिर झड़ रही,
वक्त की इस बेरहम, तलवार से ।।

हूँ   तड़प   उठता ,  अकेले  में  कभी,
क्या मिलेगा जिंदगी के , सार से।।

क्यूँ दौड़ लगाऊँ भला तुम्हे पाने को 
तुम तो चल ही रही हो ऊँगली पकडकर मेरी 
मैं चाहूं तो भी ..नहीं थाम सकती तुम्हे 
सबकुछ तुम चाहो तभी तक  

तनाव ओढ़ता है और तनाव ही बिछाता है
सुना है नौकरी करने कार्पोरेट दफ्तर जाता है।

नफे,नुकसान का सजा बाजार है हरदम
रेशमी बातों से यहाँ कारोबार किया जाता है

आज का शीर्षक क्या कह रहा है देखिए ज़रा..
सारे वादों के 
ऊपर का 
वाद होता है 
‘उलूक’ 
तेरे जैसे 
कई होते हैं 
अवसर 
मिलता है 
और 
दूसरों को 
देख हमेशा 
आँख मलते हैं 

आज्ञा दें यशोदा को
सादर














7 टिप्‍पणियां:

  1. सस्नेहाशीष संग शुभ प्रभात छोटी बहना
    पढ़ना सब लिंक्स चाहती हूँ

    उत्तर देंहटाएं
  2. शुभ प्रभात । आज के सभी लेखों को पढकर बहुत आनन्द मिला । धन्यवाद ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. शुभ प्रभात । आज के सभी लेखों को पढकर बहुत आनन्द मिला । धन्यवाद ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बढ़िया प्रस्तुति यशोदा जी। आभारी है 'उलूक' सूत्र 'विश्व हिन्दी दिवस और शब्द क्रमंचय संचय प्रयोग सब करते हैं समझते एक दो हैं' को शीर्षक देने के लिये।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर हलचल प्रस्तुति ...

    उत्तर देंहटाएं

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