पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद

समर्थक

बुधवार, 31 अगस्त 2016

411.....साँसें चल रहीं हैं! शायद जिंदा ही दफन किया जाऊँगा

सादर अभिवादन
कल भाई कुलदीप जी के वापसी नहीं होनी थी
पर अकस्मात वे टाईम से पहुँच गए
उसी फिक्र में मैं प्रस्तुति तैय्यार कर रखी थी

आज देखिए उन चुनी रचनाओं के साथ कुछ और रचनाएँ..


अपनी बात.....अनुपम वर्मा
आज वो पौधे बडे हो चुके हैं !!!खुशबू है उन चम्पा के फूलों में
मगर जुबैर और हानिया की मोहब्बत की खुशबू !!
अकसर कुंदुस बेगम के आँसुओं के क़तरे ओस के कतरों के साथ इन पौधों की सब्ज पत्तियों पर जम जाते हैं
अकसर वह इन मासूमों की अनाम कब्रों पर अपने गुनाह की सज़ा के लिये दुआ माँगती हैं



तेरे लिए खुद ही तेरा नजराना हुआ फिरता हूँ...... विजयलक्ष्मी
" दीवानगी बताऊँ क्या मस्ताना हुआ फिरता हूँ
न हो मुलाक़ात उनसे दीवाना हुआ फिरता हूँ ||

बेख्याली है कि बारिश में भीगता फिरता हूँ
बरसते है बादल जब मस्ताना हुआ फिरता हूँ ||



मन ,जी हाँ मन ,एक स्थान पर टिकता ही नही पल में यहाँ तो अगले ही पल न जाने कितनी दूर पहुंच जाता है ,हर वक्त भिन्न भिन्न विचारों की उथल पुथल में उलझा रहता है ,भटकता रहता है यहाँ से वहाँ और न जाने कहाँ कहाँ ,यह विचार ही तो है

थम जा बस इंसान यही पे
सरकार तो दोषी है ही
दर्द किसी का देख
इक दिल नहीं पसीजा
लानत है बेदर्द दुनिया तेरी


हर तारीख पुरानी याद जगा जाती है 
न भूल सका अभी एहसास दिला जाती है 
हर बार मेरा इतिहास मेरे आज से जीत जाता है 
घंटों मुझे गहराई में डूबा जाती है 
हर तारीख पुरानी याद जगा जाती है. 

कल ज़िंदगी मेरे पास आई 
चुपके से मुस्कुराई 
हौले से मेरे बाल सहलाये
धीरे से गालों पर चपत लगाई 
और फिर मेरी उंगली पकड़ 
मुझे उठा ले गयी


आज की पहली प्रस्तुति बेहद मार्मिक है
आज्ञा दें
सादर




6 टिप्‍पणियां:

  1. हमेशा की तरह एक बढ़िया प्रस्तुति यशोदा जी ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर हलचल प्रस्तुति ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति यशोदा जी ! कुछ व्यक्तिगत समस्याओं के कारण कल प्रतिक्रया नहीं दे सकी क्षमाप्रार्थी हूँ ! आज की प्रस्तुति में मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद एवं आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  5. यशोदा जी बहुत सुन्दर प्रस्तुति,मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए बहुत-बहुत आभार आपका

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...