पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

समर्थक

रविवार, 7 अगस्त 2016

387.....व्यर्थ नही है यह जीवन

नमस्कार 
सुप्रभात 
सभी बड़ो को
सादर प्रणाम 

कल 6 अगस्त के दिन आज से 71 साल पहले कलयुग के भयानक और विध्वंसक हथियार का पहली बार प्रयोग किया गया था । जिसमे जापान के हिरोशिमा शहर को उस हमले का घाव सहने पडे थे ।



उस दिन दुनिया मे मौसम आदमखोर हुआ
जिस दिन हिरोशिमा मे परमाणु विस्फोट हुआ
सुरज सबसे पहले किरणे जिस धरती को देता है
बोद्ध धर्म की उस नगरी मे भीषण नरसंहार हुआ ।।"

"6 अगस्त को अमेरिका अपनी औकात दिखा बैठा
बेकसुरो पर हमला करके अपनी जात दिखा बैठा
0.7 ग्राम यूरेनियम का यह परिणाम हुआ देखो
पल भर मे ही लाखो लोगो का नरसंहार हुआ ।।"




हर बार औरत ही क्यों
मनुहार करे ....
क्यों वही प्यार से 
जीने की बात करे ....
क्यों वही बच्चो
के नाज़ नखरे उठाये ....
ससुराल में तारतम्य
बैठाये ....
जब दो इंसानो ने
जीवन में साथ रहने
के सात वचन लिए
तो हर वचन वही
क्यों निभाने की कोशिश करे ??




व्यर्थ नही यह जीवन 
बहुत कुछ करना
अभी शेष है 
आज भी ऊर्जा 
बचा रखी है 
बहुत कुछ कर गुजरना है 
एक ऐसा  ही
कार्य चुना है 
जिसे पूर्ण करना है 
जिन्दगी की
शाम उतर आई है





'हम-तुम'
यूं ही लड़ते झगड़ते
हो गए दूर
पर अब भी
बातों का 
शिकवों का
आंसुओं और उम्मीदों का
सिलसिला बदस्तूर जारी है,.

पर 
क्या तुम्हे लगता है,
हम फिर मिलते
तो सुलझ जाते मसले


******* 
सुनो साथी  
चलो चलते हैं  
नदी के किनारे  
ठंडी रेत पर  
पाँव को ज़रा ताज़गी दे  
वहीं ज़रा सुस्ताएँगे  
अपने-अपने हिस्से का  
अबोला दर्द  
रेत से बाँटेंगे  
न तुम कुछ कहना  
न हम कुछ पूछेंगे 





जय हो 
जंगल की 
जय हो 
शेरों की 
जय हो 
भक्तों की 
जय हो 
सरकार 
और 
सरकारी 
आदेशों की 
जय हो उन 
सभी की 
जो इन सब 
की बत्ती 
बनाने वालों 
को देख 
समझ  कर 
खुद 
अपने अपने 
हनुमानों की 
चालीसा 
गा रहे हैं

●●|●●●●|||●●●●|||

आज के लिए 
इतना ही 
फिर मिलेंगे अगले 
रविवार को   
धन्यवाद 
सादर 



6 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात..
    इतनी बढिया प्रस्तुति
    मैं तो न बना पाती ऐसी
    सम्पूर्ण प्रस्तुति
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. बढ़िया अंक विरम जी । आभार 'उलूक' के सूत्र 'श्श्श्श शोर नहीं मास्साब हैं...........' को स्थान देने के लिये ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. भाई विराम जी....
    शुभकामनाएं आप को...
    दिल से प्रस्तुति बनाई है...
    लगे रहो....

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर हलचल प्रस्तुति ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. सबसे अनुभवी व्यक्तियों का ब्लॉग... धन्यवाद
    उत्तम विचार हैं आपके...
    और भी पढ़ें... bhannaat.com, मोबाइल जानकारी के लिए... digitechon.com

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत उम्दा हलचल |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद सर |

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...