पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद

समर्थक

बुधवार, 3 अगस्त 2016

383...........मालिक ये हाथ रखें नीचे,हम हाथ उठाना सीख गए


पन्द्रह दिन ही बचे सावन के
.................
ग़ज़ल के दो श़ेर..
फिर घटा ज़हन के आकाश में छाई हुई है
मेरे चौखट प कोई नज़्म सी आई हुई है

लौट आईं हैं गए दिन की सदायें मुझमें
भीगती कांपती इक शाम भी आई हुई है
-दिनेश नायडू-
पूरी ग़ज़ल पढ़वाऊँगी मेरी धरोहर में

शुरु करते हैं फिछले साल से..

एक साल पहले....
जिन्दगी तो है हकीकत पर टिकी, 
मत इसे जज्बात में रौंदा करो। 

चाँद-तारों से भरी इस रात में, 
उल्लुओं सी सोच मत रक्खा करो।


आसपास के बच्चों के खेलने के लिए जिद करने पर कई बार उनके साथ कार्ड्स खेलना भी होता है। उसमें एक गेम है 'ब्लैक क्वीन'। उसमें सब ब्लैक क्वीन से कितना डरते हैं। एक दिन फील हुआ इस ब्लैक क्वीन के साथ कितना रंगभेद हो रहा है। और फिर बच्चे इसी तरह तो बचपन से ही ये सारे भेदभाव सीख जाते हैं। इसलिए मैं बदल-बदल कर 'रेड क्वीन' भी खेल लेती हूँ उनके साथ। अब से ब्लैक और रेड किंग भी खेला करुँगी।


दम्भ.... प्रतिभा स्वति 
 सुना सबने  है ,पर    
कौन  कहता  है ? 
कि  दम्भ  / सिर्फ़ 
इंसान  में  रहता है !


टि्वटर पर कवि और कविता....अंशु माली रस्तोगी
वे हमारे मोहल्ले के वरिष्ठ कवि हैं। खुद को केवल कवि नहीं हमेशा वरिष्ठ कवि कहलाना ही पसंद करते हैं। भूलवश अगर कोई उन्हें कवि कह दे तो बुरा मान जाते हैं। दुआ-सलाम तक खत्म कर देते हैं। ऐसा एक दफा वे अपनी पत्नी के साथ कर चुके हैं। बहरहाल। 

आज का शीर्षक..
मालिक ये हाथ रखें नीचे,हम हाथ उठाना सीख गए..... सतीश सक्सेना
मालिक गुस्ताखी माफ़ करें,घर बार हिफाज़त से रखना
बस्ती के बाहर भी रह कर,हम आग जलाना सीख गये !

अपना क्या था बचपन से ही,अपमानों में जीना सीखा,
मालिक हम ऊँचे महलों की दीवार गिराना सीख गये !

इंसानों का जीवन पाकर, कुत्तों सा जीवन जिया मगर,
मालिक ये हाथ रखें नीचे,हम हाथ उठाना सीख गए !

आज्ञा दें यशोदा को
सादर











5 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात
    सादर प्रणाम
    बहुत सुंदर
    आनंद हि आनंद है

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति यशोदा जी ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर हलचल प्रस्तुति हेतु धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेहतरीन पठनीय लिंक , आभार आपका

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...