पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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सोमवार, 25 जुलाई 2016

374....कपड़ा होना होता है हरी सोच के लोगों का हरा, सफेदों का सफेद और गेरुई सोच का गेरुआ होना होता है

सादर अभिवादन
बाल-बाल बचे
कुछ तो करना ही होगा
ताकि सुरक्षा बनी रहे...
कहते हैं न
जाको राखे सांईया
मार सके न कोय

चलिए और देखिए आजकी पढ़ी चुनी..

"यत्र नार्यस्य पूज्यंते रमन्ते तत्र देवता" 
अर्थात् जहाँ नारी पूजी जाती है वहाँ देवताओं का वास होता है। 
अब तो नारियों को गाली दी जाती है और इस कुकृत्य में सिर्फ पुरुष ही शामिल हैं ऐसा कहना गलत होगा। जब स्त्रियाँ किसी सम्माननीय और जिम्मेदार ओहदों पर पहुँच जाती हैं तब उनमें से भी कुछ स्वयं की अर्थात् स्त्री की मर्यादा भूल जाती हैं।


कर दी अंग्रेजी की हिन्दी...विष्णु बैरागी
यह उज्जैन से प्रकाशित एक सान्ध्यकालीन अखबार की कतरन है। उज्जैन की पहचान कवि कालीदास और राजा विक्रमादित्य से होती है। यह सोलह आना हिन्दी इलाका है जहाँ अंग्रेजी जानने/समझनेवालों का प्रतिशत दशमलव शून्य के बाद का कोई अंक ही होगा। किन्तु बोलचाल की भाषा के नाम पर अंग्रेजी बहुवचन का भी बहुवचन कर दिया गया है। यह हमारी मानसिक गुलामी की पराकाष्ठा है।



जितना है—वह काफी है.
मुट्ठी में जो है-वह हीरा है.
जो फेंक दिया गया-लौट कर नहीं आएगा.
अतः जीवन की झोली को बांधे रखिये-
वक्त के साथ-उसे खर्चिये भी.

शाख किसी दरख़्त की 
यदि झुक जाए थोड़ी भी 
दम भर सुस्ता लूँ 

क्या लिखूँ क्या छोड़ूँ.....अर्चना चावजी
मिलने आए हमसे "यम"
मिलकर हममे गये हैं रम
चाहे जितने दे ले गम
बड़े प्यार से झेलें हम



चाँद उतरा अब हमारे अंगना 
रोशनी को झिलमिलाना आ गया 

रूठ कर साजन न तुम जाना कहीं 
प्यार में हम को मनाना आ गया 


लक्ष्मी सहगल
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक  
चन्द्रशेखर आजाद
हम सब की ओर से इन तीनों महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को शत शत नमन ! 

और अंत में आज के शीर्षक की बारी..
'उलूक' 
तेरे जैसे 
बेवकूफों 
के पुतले 
फुँकवाने 
के लिये 
"होशियार" 
के पास 
समय ही 
नहीं होता है ।

आज्ञा दें दिग्विजय को
फिर मुलाकात होगी
कभी भी-कहीं भी







12 टिप्‍पणियां:

  1. एक साथ दो लिंकों को शामिल करने के लिए आभारी हूँ

    उत्तर देंहटाएं
  2. शुभ प्रभात
    उम्दा प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुप्रभात
    सादर प्रणाम
    उम्दा लिंको का संकलन

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुप्रभात, विविधरंगी हलचल..

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर सोम्वारीय हलचल। आभार दिग्विजय जी 'उलूक' के सूत्र को शीर्षक देने के लिये ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. अति सुंदर...
    आभार सर आप का...

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत बढ़िया हलचल प्रस्तुति ....

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर और उत्कृष्ट संकलन, आभार मेरी रचना को शामिल करने के लिए।

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुंदर और उत्कृष्ट संकलन, आभार मेरी रचना को शामिल करने के लिए।

    उत्तर देंहटाएं

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