पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद

समर्थक

शुक्रवार, 24 जून 2016

343... सिर्फ मुस्कुराने की आदत होनीचाहिये...


जय मां हाटेशवरी...

आनंद ही आनंद है...
बस पढ़ने का जनून होना चाहिये...
ज़िन्दगी एक हसीन ख्वाब है...
 जिसमें जीने की चाहत होनीचाहिये...
 गम खुद ही खुशी में बदल जायेंगे...
 सिर्फ मुस्कुराने की आदत होनीचाहिये...
अब पेश है...कुछ चयनित कड़ियां....
अभिभावक भी अपना कर्तव्य समझें
s320/Accident11
यहाँ समझने वाली बात ये है कि स्कूल के बच्चे को बाइक किसी घर से ही मिली होगी. चाहे वो उसका अपना घर रहा हो अथवा उसके किसी दोस्त का. क्या उनके माता-पिता का
दायित्व नहीं बनता है वे बच्चों को बाइक चलाने से रोकें. यहाँ दुर्घटना होने की स्थिति में प्रशासनिक लापरवाही से अधिक पारिवारिक लापरवाही का मामला सामने आता
है. ऐसी कई-कई दुर्घटनाएँ नदियों, बाँधों, रेलवे ट्रेक, सड़क, आदि पर आये दिन दिखाई देती हैं.

राष्ट्रभक्तों को समर्पित २३ जून
s1600/spmukherjee
डॉ० श्यामाप्रसाद मुखर्जी (जन्म: 6 जुलाई, 1901 - मृत्यु: 23 जून, 1953) महान शिक्षाविद्, चिन्तक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे। एक प्रखर राष्ट्रवादी के रूप
में भारतवर्ष की जनता उन्हें स्मरण करती है। एक कट्टर राष्ट्र भक्त के रूप में उनकी मिसाल दी जाती है। भारतीय इतिहास उन्हें एक जुझारू कर्मठ विचारक और चिन्तक
के रूप में स्वीकार करता है। भारतवर्ष के लाखों लोगों के मन में एक निरभिमानी देशभक्त की उनकी गहरी छबि अंकित है। वे आज भी बुद्धिजीवियों और मनीषियों के आदर्श
हैं। वे लाखों भारतवासियों के मन में एक पथप्रदर्शक एवं प्रेरणापुंज के रूप में आज भी समाये हुए हैं।

कुर्सी
है धोखे में पड़ा
कि संसार चलाता है।
अमीरों की है सुनता
बस पैसा उगाता है,
ज़मीनें बंजर हो रहीं, देखो
किसान फंदा लगाता है।

उड़ता पंजाब की लेट समीक्षा
उड़ता पंजाब की कहानी उस पंजाब की कहानी है, जो हम लोग परदे पर नहीं आम जनजीवन में देखते हैं। यह वही कहानी है, जिसकी वजह से बठिंडा से बीकानेर तक जाने वाली
ट्रेन कैंसर एक्सप्रेस में बदल जाती है। यही वह कहानी है जिसकी वजह से यह एक राजनीतिक मुद्दा बनना चाहिए लेकिन बन नहीं पाता। फिल्म उस गहरे सियासी चक्र को छूती
तो है लेकिन उसको खोलती नहीं है।

ये मोहब्बत
छोडो यार ये इश्क़ है ये तुम्हारे बस की बात नहीं यहां दिखावो का खेल नहीं चलता सिर्फ दिल की बात होती है














यक-ब-यक जागके
वही लम्हा तुम्हारी हसरतें करता है बयाँ
इश्क में भीग के बैठी हो – लेके अंदाज़ नया
कभी आँखों पे आकाश उठा लेती हो -
कभी तारों को उन आँखों में समाते देखा..!


चमचमाती दिल्ली का सच
जिसमें दिल्ली में झुग्गी-बस्तियों की जनसंख्या 20,29,755 (सही आंकड़े 40 लाख से अधिक है) है।
यूएनडीपी के ह्यूमन डेवलपमेंट रिपोर्ट 2009 में कहा गया है कि मुम्बई में 54.1 प्रतिशत लोग 6 प्रतिशत जमीन पर रहते हैं। दिल्ली में 18.9 प्रतिशत, कोलकता में 11.72 प्रतिशत तथा चेन्नई में 25.6 प्रतिशत लोग झुग्गियों में रहते हैं।

आज की प्रस्तुति बस यहीं तक....
 अभी ना पूछो मंज़िल कँहा है,...
 अभी तो हमने चलने का इरादा किया है।...
ना हारे हैं ना हारेंगे कभी...
 ये खुद से वादा किया है।...
धन्यवाद।







7 टिप्‍पणियां:

  1. हकीकत से रूबरू
    ...............
    1 हल्की हल्की बारिश हो रही है गरीब किसान अपने खैत में पैड़ के नीचे बैठा है हाथ में कुदाल है रोटीयां कपड़े में लिपटी है लहलहाती फसल को यकटक देख रहा है बहूत खुश है .फसल अच्छी जो थी .
    2 रेडियो पर खबर चल रही है हर जगह एक ही नारा है कांग्रेस मुक्त भारत होगा.मोदी जी की लहर चल गई .हर जगर शौर है पटाखे जलाऐ जा रहे हैं मिठाईयां बांटी जा रही है
    1 किसान सोच रहा था की इस साल अगर फसल अच्छी हुई तो बेटियों की शादी करूंगा बेटे को पढाउंगा सारा कर्ज चुका दुंगा गरीबी खतम होगी और हमारे भी अच्छे दिन आऐंगे
    2 भाषणों का दौर शुरू हो चुका है किसी खैमे में खुशी है तो कहीं सन्नाटा पसरा है आरोप लगाऐ जा रहै हैं मंथन शुरू हो चुका है
    1 बादलो की गड़गड़ाहट के बीच किसान का कलेजा हिल जाता है अगर हल्की सी ज्यादा बारिश हुई या तेज हवा चली तो सारे सपने टूट जाऐंगे फिर पिछली बार की तरह कौई खबर नहीं लेगा कर्जा भी तो जीने नहीं देगा...
    2 अगले चुनाव के लिऐ रणनीतियां बनाई जा रही है बधाईयां दी जा रही है शपथ की तैयारी हो रही है मंच सजाऐ जा चुके हैं..
    1 अचानक हल्का सा तुफान आता है और किसान की सारी फसल बरबाद किसान की आंखों मे आंसू हैं की अब कर्ज कैसे चुकाउंगा भारी मन से इसी पैड़ पर गले मे मफलर डाल लटक जाता है
    2 शपथ के बाद नेता जी का पहला भाषण शुरू हो चुका है ...
    में शपथ लेता हूं की में गरीबो के हक के लिऐ लड़ूंगा जो साठ सालों मे नहीं हुआ वो हम करेंगे हम कांग्रेस मुक्त भारत का सपना साकार करेंगे हम रोजगार देंगे. किसानों का कर्ज माफ करने के बारे मे विचार करेंगे "अच्छे दिन आऐंगे "
    ..
    काश, कांग्रेस मुक्त भारत की जगह गरीबी मुक्त भारत का नारा होता ...

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आप टिप्पणी देने से पूर्व इसे अवश्य पढ़ें...
      1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर 2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
      ३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
      4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।

      हटाएं
  2. भाई कुलदीप जी
    शुभ प्रभात
    बढ़िया रचनाओं का चयन
    साधुवाद..

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुप्रभात
    भाई कुलदीप जी
    सुन्दर कडीयो का चयन

    उत्तर देंहटाएं
  4. बढ़िया हलचल प्रस्तुति
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  5. कुलदीप जी बढ़िया हलचल प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...