पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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बुधवार, 15 जून 2016

334....देखना/ दिखना/ दिखाना/ कुछ नहीं में से सब कुछ निकाल कर ले आना

आज मैं दिग्विजय आपके समक्ष हूँ
अभिवादन स्वीकार करें...

मुझे ऑफिस से लौटने में आधे घण्टे की देरी हो गई
कि मेरी कुछ पंक्तियाँ चोरी हो गई
बिलकुल वैसे ही..जैसे पर्स से पैसे ....
इसी लिए आज ऑफिस जाने से पहले ही
ये प्रस्तुति तैय्यार कर दिया है
भुक्तभोगी जो हूँ....

चलिए बातें-वातें तो होती ही रहेंगी आगे बढ़ते हैं....


जीवन के इस एक बरस में ,वादे टूटे - टूटी कसमें 
करवट आज समय की देखो,ना तेरे ना मेरे वश में ।।
आज महोत्सव मातम हो कर , साथ खड़ा है बीते कल के 
तुमसे मिलने पर जिस कल को , मैंने ही बनवास दिया  ।।


रेगिस्तान की झुलसती बारिश में
भीगता तड़पता मेरा मन
हर क्षण आतुर
जल के लिए
सामने है नज़र
सम्मुख आए तो मिली
मृगतृष्णा,
व्याकुल, विह्वल और कोमल
दौड़ता भागता मेरा मन …..

"पति-पत्नी और वो" में संजीव कुमार द्वारा अभिनीत पात्र को सामने कर "बाथरूम सिंगिंग" यानि हमाम गायिकी के विषय को छुआ गया था, पर  उनका बाल्टी-लोटे से नहाना उस गाने को वह ऊंचाइयां नहीं छूने देता जिसकी वहां आवश्यकता थी। हर साधना के कुछ नियम होते हैं जिनका पालन करना ही पड़ता है। बाल्टी-मग्गे से नहाते समय ध्यान बाल्टी के कम होते पानी और लोटे  को साधने में ही अटका रहता है और सुर भटकने का खतरा बन जाता है। दूसरी तरफ पानी जरूर कुछ ज्यादा लगता है पर बात शॉवर से छलकती अनवरत जल-राशि से ही बनती है  !


"शहर में तेरे जीने का सामान कहाँ,
मैखाने हैं पर आँखों के जाम कहाँ!

कुछ और सबब होगा उसकी बेचैनी का,
रखता है सर मेरे वो इल्जाम कहाँ!

अतुकांत छन्दहीन कविता 
जैसे कोई विधवा श्रृंगार विहीन 
मगर क्या दोनों के 
सौष्ठव में कोई अंतर दीखता है 
गेयता हो या नहीं 
श्रृंगार युक्त हो या श्रृंगार विहीन 
आत्मा तो दोनों में ही बसती है ना

आज की शीर्षक रचना
कब तक अपनी
आँख से खुद
ही देखता रहेगा
‘उलूक’
गोद में चले जा
किसी गाँधारी के
सीख कर आ
किसी धृतराष्ट्र के
लिये आँख बंद कर
उसकी आँखों से
देखने की कला
तभी होगा तेरा और
तेरी सात पुश्तों का
तेरी घर गली शहर
प्रदेश देश तक के
देश प्रेमी संतों का भला ।


आज बस इतना ही...
इज़ाजत दें ..
और ये गीत देखें व सुनें







4 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर बुधवारीय अंक दिग्विजय जी। आभार 'उलूक' का सूत्र 'देखना/ दिखना/ दिखाना/ कुछ नहीं में से सब कुछ निकाल कर ले आना'को शीर्षक रचना का स्थान देने के लिये ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर लिंकों से सजी शानदार हलचल ........आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. दिग्विजय जी,
    पोस्ट सम्मलित करने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं

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